संवाद सहयोगी, चम्पावत : एसएसबी की पांचवी वाहिनी में तैनात सिपाही सुनील कुमार बीते सात मार्च को पांच दिन का अवकाश लेकर अपने गृह जनपद रुद्रप्रयाग को गया था। अवकाश के बाद रुद्रप्रयाग से ड्यूटी ज्वाइन करने के लिए वापस चम्पावत को निकला। लेकिन एसएसबी पांचवी वाहिनी चम्पावत में नहीं पहुंचा। वहीं वाहिनी के एक उपनिरीक्षक की सक्रियता के चलते लापता सिपाही को बरामद करने में सफलता मिली।

आरक्षी के लापता होने से परिवार वाले भी चिंता में थे। ड्यूटी को जाने के बाद जब सुनील का कॉल नहीं आया और नंबर बंद आने के बाद उसकी पत्‍‌नी ने एसएसबी वाहिनी के कंट्रोल रूम में कॉल कर जब जानकारी लेनी चाही तो पता चला कि अभी तक सुनील यहां नहीं पहुंचे। जिसके बाद एसएसबी ने टनकपुर सहित कई स्थानों पर आरक्षी सुनील की तलाश शुरू की, लेकिन कुछ पता नहीं चल पाया। एसएसबी पांचवीं वाहिनी के कार्यवाहक कमांडेंट गुरविंदरजीत सिंह ने बताया 16 मार्च को जब उपनिरीक्षक बसंत लाल वाहिनी मुख्यालय से अवकाश पर जा रहे थे। इसी बीच उन्होंने टनकपुर से देहरादून जा रही बस में आरक्षी सुनील कुमार को बैठा हुआ देखा। इसकी सूचना उन्होंने तुरंत इसकी सूचना वाहिनी मुख्यालय में दी तथा वाहिनी द्वारा सुनील के परिजनों को भी इसकी सूचना दी गई। 17 मार्च सुबह चार बजे उपनिरीक्षक बसंत लाल द्वारा आरक्षी सुनील को उसके छोटे भाई देव चंद्र के सुपुर्द कर दिया गया जिसके बाद परिजन उसे घर ले गए। सुनील के इतने दिन गायब रहने के बारे में अभी तक पूछताछ नहीं हो पाई है।

Posted By: Jagran

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