संवाद सहयोगी, चम्पावत : लोहाघाट के सुई स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के विज्ञानियों ने परीक्षण के बाद टमाटर की मिहिर प्रजाति को पहाड़ की जलवायु के लिए उपयुक्त पाया है। केंद्र में इस प्रजाति के टमाटर का उत्पादन करने के बाद उसके बीज तथा पौधों को प्रथम पथ प्रदर्शन के तहत काश्तकारों को उपलब्ध कराया जाएगा।

केंद्र के प्रभारी अधिकारी डा. एमपी सिंह ने बताया कि टमाटर की नई हाइब्रिड मिहिर प्रजाति का सफल उत्पादन किया गया है। यह प्रजाति जिले की जलवायु के लिए काफी उपयुक्त साबित हुई है। बताया कि परीक्षण के तौर पर केंद्र में 200 वर्ग मीटर के पॉलीहाउस में अपेक्षा के अनुरूप उत्पादन हुआ है। टमाटर की यह प्रजाति 40 से 45 दिन में फल देनी शुरू कर देती है। एक पौध करीब पाच से छह किलो फल दे रहा है। उन्होंने बताया कि 100 वर्ग मीटर में इस प्रजाति से तीन से चार क्विंटल टमाटर पैदा किया जा सकता है। इसके पौध को 40 से 45 सेमी की दूरी पर लगाना चाहिए। टमाटर की अन्य प्रजाति के पौध की तरह इसके पौध की ऊंचाई एक फीट हो जाने के बाद दो शाखाओं को ही ऊपर बढ़ने देना चाहिए। इससे पैदावार अच्छी होगी। डा. सिंह ने बताया कि आगामी सीजन में इसका प्रथम पथ प्रदर्शन काश्तकारों के खेतों में किया जाएगा। प्रगतिशील काश्तकारों को टमाटर का बीज एवं पौध उपलब्ध कराए जाएंगे। साथ ही टमाटर उत्पादन का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।

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अधिक उत्पादन के लिए समय पर करें छिड़काव

फसल सुरक्षा विज्ञानी डा. एमपी सिंह ने बताया कि इस सीजन में जिले में टमाटर का उत्पादन तो काफी अच्छा हुआ है, लेकिन सड़ने की शिकायत ज्यादा मिल रही है। बताया कि पत्तियों और फलों को काला पड़ने से बचाने के लिए कॉपर आक्सी क्लोराइड दवा की तीन ग्राम मात्रा को एक लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए। इसी प्रकार छेदक कीट (पिन वर्म) से बचाने के लिए इंडाक्लोप्रिट दवा की चार एमएल मात्रा को एक लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए।

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छिड़काव के एक हफ्ते तक सब्जियां न खाएं और न बेचें

टमाटर समेत अन्य सब्जियों में कीटनाशक दवा के छिड़काव के बाद एक सप्ताह तक उन्हें न तो खाना व बेचना नहीं चाहिए। यह काफी नुकसानदेह साबित हो सकता है। डा. एमपी सिंह ने बताया कि कीटनाशक का छिड़काव करने से पूर्व पककर तैयार हो चुके टमाटर को तोड़ लेना चाहिए।

Edited By: Jagran