संवाद सहयोगी, चम्पावत : अपने क्षेत्र की नौ में से छह जिला पंचायत सीटों को जिताने के बाद अब लोहाघाट के विधायक पूरन सिंह फत्र्याल किंग मेकर की भूमिका में आ गए हैं। चर्चा है कि छह में से दो सीटें जिताने में सफल रहे चम्पावत के विधायक कैलाश गहतोड़ी के हाथ से यह मौका लगभग निकल चुका है। अध्यक्ष पद के लिए सामान्य महिला सीट होने और अधिकांश महिला सदस्यों के भाजपा से आने के चलते इस बार अध्यक्ष पद का चुनाव निर्विरोध होने की संभावना की काफी अधिक बढ़ गई हैं।

लोहाघाट के विधायक पूरन सिंह फत्र्याल अपने विधान सभा क्षेत्र में आने वाली रैघांव, मटियानी, राईकोट कुंवर, फर्तोला, जनकांडे, सीटें भाजपा की झोली में डालने में सफल रहे जबकि चम्पावत के विधायक कैलाश गहतोड़ी टनकपुर और शक्तिपुरबुंगा की सीट पर ही अपने प्रत्याशियों को जिता पाए। जिसकी जितनी संख्या भारी उसकी उतनी हिस्सेदारी के फार्मूले से अब लोहाघाट के विधायक के हाथ में जिला पंचायत अध्यक्ष बनाने की चाबी आ गई है। साफ है कि विधायक अपनी गोटी में फिट बैठने वाले सदस्य को अध्यक्ष बनाने के लिए पूरी ताकत झोंक देंगे। सूत्रों के अनुसार विधायक ने इसके लिए प्रयास भी शुरू कर दिए हैं। मंगलवार से जीते हुए सदस्यों के साथ बैठकों का दौर भी चल गया है। जानकारी के अनुसार विधायक ने सभी प्रत्याशियों के किसी एक के पक्ष में आम सहमति बनाने के निर्देश भी जारी कर दिए हैं। जानकारों की मानें तो रैघांव सीट से जीती ज्योति राय, राईकोट कुंवर से जीती प्रीति पाठक और शक्तिपुरबुंगा से सविता बोहरा में से किसी एक को अध्यक्ष पद पर प्रोजेक्ट किया जा सकता है। सभी प्रत्याशियों के भाजपा के बैनर तले चुनाव जीतने के चलते अध्यक्ष पद के लिए आम सहमति बनाने में मुश्किल भी नहीं आने वाली है। चम्पावत के विधायक की बात करें तो इस बार जिला पंचायत के चुनाव में उनकी रणनीति पूरी तरह सफल नहीं हो पाई। यहां जिला पंचायत सदस्यों की संख्या के लिहाज से कैलाश गहतोड़ी का गणित कमजोर हो गया है।

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हमारे पास तीन सामान्य महिलाएं हैं। पार्टी द्वारा नियुक्त प्रेक्षक के साथ बैठक के बाद जिला पंचायत अध्यक्ष के लिए नाम तय किया जाएगा। इसमें दोनों विधायकों से भी सहमति ली जाएगी। एक दो दिन में स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। = रामदत्त जोशी, भाजपा जिलाध्यक्ष, चम्पावत

Posted By: Jagran

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