संवाद सहयोगी, लोहाघाट : विशुग क्षेत्र के महान संगीतज्ञ एवं रंग मंच के कलाकार 82 वर्षीय भगवान सिंह करायत उर्फ सूरदास पुत्र स्व. दलीप सिंह करायत का मंगलवार को निधन हो गया। भगवान सिंह जन्म से नेत्र हीन थे, लेकिन नेत्रहीन होने के बाद भी रंगमंच व संगीत के अच्छे जानकार थे। जिस कारण लोग उन्हें सूरदास कहते थे। उनके निधन पर क्षेत्र में शोक की लहर है। उनका अंतिम संस्कार स्थानीय शमशान घाट सुपकेश्वर में किया गया। चिता को मुखाग्नि दरवान सिंह करायत, जगत सिंह, विजय सिंह, मोहन सिंह ने दी।

दलीप सिंह के घर पर जब इस पाचवें बालक का जन्म हुआ तो उस समय किसी ने नहीं सोचा था कि वो जन्म से ही नेत्र हीन हैं, परन्तु समय के साथ बड़े होते होते वह इस क्षेत्र के महान रंग कर्मी और संगीत के बड़े कलाकार बन गया। उन्होंने चम्पावत, पिथौरागढ़, लोहाघाट, टनकपुर आदि अनेक स्थानों में घर घर जाकर व विद्यालयों सैंकड़ों स्कूली बच्चों व क्षेत्रवासियों को संगीत की शिक्षा दी। लोगों से मिली जानकारी के मुताबिक सूरदास को 13 वर्ष की उम्र में मायावती आश्रम के एक स्वामी जी ने लखनऊ नेत्रहीनों के विद्यालय में दाखिला दिलाया। संगीत की शिक्षा प्राप्त की उसके बाद क्षेत्र में एक संगीत शिक्षक के रूप में अपनी पहचान बनाई। आंख की रोशनी न होने के बाद भी वह अपना कार्य स्वयं करते थे। यहां तक की लोगों को आवाज से पहचान लेते थे। उन्होंने अपने जीवन में हमेशा ही संगीत की अलख जगाई रखी है क्षेत्र के सैकड़ों लोग उनके संगीत शिष्य हैं। कुमाऊं लोक सास्कृतिक कला दर्पण के अध्यक्ष भैरव राय ने बताया कि क्षेत्र में कलाकारों को तैयार करने का श्रेय इनको ही जाता है। उनके निधन पर क्षेत्रीय विधायक पूरन सिंह फत्र्याल, नवीन मुरारी, नरेश करायत, दान सिंह करायत, महेश फत्र्याल, रघुवर मुरारी, त्रिभुवन उपाध्याय, भुवन करायत, अनिल करायत, आकाश करायत, नीरज करायत, राम सेवा सास्कृतिक कला मंच के अध्यक्ष जीवन मेहता, नरेश राय, प्रकाश राय कीर्ति चौबे सहित सामाजिक, राजनीतिक संगठनों के लोगो ने गहरा दुख जताया है।

Posted By: Jagran

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