विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

उत्तराखंड का पिरूल ऊर्जा मॉडल अब अरुणाचल प्रदेश में भी होगा लागू, लोहाघाट पहुंची टीम

Published: Sat, 22 Aug 2026 02:50 PM (IST)Updated: Sat, 22 Aug 2026 05:27 PM (IST)

Uttarakhand Pirul energy project: अरुणाचल प्रदेश स्टेट काउंसिल फॉर साइंस एंड टेक्नोलॉजी के अध्यक्ष ने पाटी ब्लॉक के भिंगराड़ा में स्थापित पाइन नीडल ब्रिकेटिंग प्लांट का दौरा किया।

News Article Hero Image
timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

संवाद सहयोगी जागरण, लोहाघाट । Uttarakhand Pirul energy project: पाटी ब्लाक के भिंगराड़ा में पिरूल को समस्या के बजाय संसाधन में बदलने की पहल अब दूसरे राज्यों का ध्यान भी आकर्षित कर रही है। भिंगराड़ा में स्थापित पाइन नीडल ब्रिकेटिंग प्लांट का अरुणाचल प्रदेश स्टेट काउंसिल फार साइंस एंड टेक्नोलाजी के अध्यक्ष डा. टागे टाकी और श्रींटागे तागयो ने दौरा कर प्लांट की कार्यप्रणाली और पिरूल से ऊर्जा उत्पादन की संभावनाओं की जानकारी ली।

यह परियोजना उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकोस्ट) के वित्त पोषण से सीएसआईआर-भारतीय पेट्रोलियम संस्थान, देहरादून की ओर से स्थापित की गई है। दौरे के दौरान डा. टागे टाकी ने पाइन नीडल से ब्रिकेट तैयार करने की प्रक्रिया के साथ ही इसके पर्यावरणीय और आर्थिक लाभों की जानकारी ली।

महिलाओं ने संभाली प्लांट की कमान डा. टागे टाकी ने विशेष रूप से इस बात की सराहना की कि दूरस्थ पर्वतीय गांव में स्थापित इस यूनिट की कमान स्थानीय महिलाओं ने संभाल रखी है। समूह से जुड़ी महिलाएं पिरूल के संग्रह से लेकर प्लांट संचालन और ब्रिकेट निर्माण तक की जिम्मेदारी निभा रही हैं।

उन्होंने कहा कि भिंगराड़ा की महिलाओं ने साबित किया है कि अवसर, तकनीक और सहयोग मिलने पर ग्रामीण महिलाएं स्थानीय संसाधनों के माध्यम से रोजगार का सृजन कर सकती हैं। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलती है।

उन्होंने इस पहल से जुड़ी महिलाओं को अन्य ग्रामीण क्षेत्रों के लिए प्रेरणास्रोत बताया।डा. टागे टाकी ने अरुणाचल प्रदेश में पाइन नीडल जैसे वन-आधारित बायोमास से ऊर्जा उत्पादन और रोजगार सृजन की संभावनाओं पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि भिंगराड़ा के इस माडल से प्रेरणा लेकर अरुणाचल प्रदेश में भी इसे अपनाने की दिशा में प्रयास किए जाएंगे।भिंगराड़ा की यह पहल अब केवल एक गांव की परियोजना नहीं रह गई है, बल्कि पर्वतीय क्षेत्रों में पिरूल प्रबंधन, महिला सशक्तीकरण, स्वच्छ ऊर्जा और ग्रामीण रोजगार का प्रभावी माडल बनती जा रही है।

दूसरे राज्य के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं तकनीकी प्रतिनिधि द्वारा यहां पहुंचकर माडल का अध्ययन किया जाना ग्रामीणों, यूकोस्ट और सीएसआईआर-भारतीय पेट्रोलियम संस्थान के लिए गौरव की बात है। पिरूल के वैज्ञानिक उपयोग से जहां जंगलों में आग के खतरे को कम करने में मदद मिल रही है, वहीं स्थानीय स्तर पर रोजगार, स्वच्छ ऊर्जा और ग्रामीण आय के नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं।