मोदी सरकार - 2.0 के 100 दिन

संवाद सहयोगी, चम्पावत : जिला मुख्यालय से करीब 30 किमी दूर अमोड़ी में डिग्री कॉलेज तो शुरू हुआ लेकिन अभी तक कालेज वैकल्पिक व्यवस्था में चल रहा है। वोट बैंक के चलते अमोड़ी में कॉलेज शुरूतो करा दिया, लेकिन आज भी कॉलेज के 136 विद्यार्थी राजकीय इंटर कॉलेज के दो कमरों में अध्ययन कर रहे हैं। कॉलेज न बनने से आज भी व्यवस्था जस की तस है।

कांग्रेस शासन काल में अमोड़ी क्षेत्र में महाविद्यालय बनाने की शासन से संस्तुति मिल गई थी तथा भूमि भी स्वीकृत हो गई थी। जिसके अमोड़ी के जीआइसी के दो कमरों में वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर महाविद्यालय शुरू कर दिया गया। तब से आज तक अध्ययनरत छात्र-छात्राएं महाविद्यालय के भवन की राह तक रहे हैं। लेकिन भवन निर्माण न होने से विद्यार्थी उन्हीं दो कमरों में अध्ययन करने को मजबूर हैं। वर्तमान में अमोड़ी महाविद्यालय में 136 विद्यार्थी अध्ययन कर रहे हैं। जिनके लिए दो कमरे पर्याप्त नहीं हैं। कालेज में सात प्रवक्ता अध्यापन कार्य कर रहें हैं जिसमें से तीन पर्मानेंट, तीन गेस्ट व वैकल्पिक व्यवस्था पर हैं। कालेज में अंग्रेजी व संस्कृत के दो पद रिक्त हैं। महाविद्यालय में न तो विद्यार्थियों के बैठने के लिए पर्याप्त स्थान है और न ही सभी विषयों के शिक्षक। कोई और विकल्प न होने के चलते स्थानीय छात्र-छात्राओं को इसी व्यवस्था में अध्ययन करना पड़ रहा है।

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प्रथम किश्त के बाद नहीं मिला बजट

अमोड़ी में महाविद्यालय बनाने के लिए लधिया नदी के पास भूमि मिली है। शासन से महाविद्यालय के लिए 493 लाख का बजट की स्वीकृत हुआ था तथा भवन निर्माण के लिए प्रथम किश्त के रूप में कार्यदायी संस्था यूपी निर्माण निगम को 50 लाख अवमुक्त हो गए थे। जिससे केवल भवन की नीव ही पड़ पाई थी। उसके बाद से आज तक महाविद्यालय भवन के लिए शासन से कोई बजट नहीं मिला।

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इस बार 100 विद्यार्थी और बढ़ने की संभावना

जब अमोड़ी में महाविद्यालय नहीं था तो छात्र-छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए चम्पावत, लोहाघाट व टनकपुर की ओर जाना पड़ता था। लेकिन कालेज बनने से जहां छात्र-छात्राओं को इसका लाभ मिल रहा है वहीं प्रति वर्ष दूर दराज से आने वाले छात्र-छात्राओं की संख्या बढ़ रही है। इस वर्ष भी करीब 100 विद्यार्थियों के बढ़ने की संभावना है। ऐसे में विद्यार्थी कैसे अध्ययन करेंगे सोचनीय विषय है।

=================== महाविद्यालय में शिक्षकों व अन्य स्टॉफ की कमी है। भवन न होने से आने वाले समय में परेशानी बढ़ने वाली है। विद्यार्थियों के लिए लाइब्रेरी में पर्याप्त किताबें नहीं हैं।

-मनीषा चौहान, अध्यक्ष छात्र संघ

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कालेज के पास स्वयं का भवन न होने और पर्याप्त जगह व फर्नीचर के अभाव में सभी विद्यार्थियों को परेशानी का समाना करना पड़ रहा है।

- राजेंद्र भट्ट, छात्र संघ उपाध्यक्ष

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जीआइसी के दो कमरों में विद्यार्थियों के लिए पर्याप्त जगह न होने से परेशानी हो रही है तथा नए सत्र से छात्र संख्या बढ़ने से समस्या और बढ़ जाएगी। खाली पड़े ग्राम पंचायत भवन को लेने के लिए जिलाधिकारी से वार्ता की जाएगी।

-डॉ. कमला जोशी, प्राचार्य, महाविद्यालय अमोड़ी

Posted By: Jagran

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