कालिका प्रसाद, कर्णप्रयाग:

बंदरों से निजात के लिए केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग बंदरबाड़ा तैयार कर पशु चिकित्सकों की देखरेख में बधियाकरण की प्रक्रिया शुरू करेगा। जिससे बंदरों की बढ़ती आबादी को नियंत्रित किया जा सके और क्षेत्रवासियों की समस्या का निदान भी हो सके।

केदारनाथ वाइल्ड लाइफ डिवीजन अधिकारियों की माने तो इसके लिए केदारनाथ वन क्षेत्रांतर्गत भूमि का चयन कर बंदरबाड़ा सहित अन्य संसाधन संबंधी डीपीआर तैयार कर (सेंट्रल जू अथारिटी) केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण को स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा।

जनपद चमोली में बंदरबाड़ा बनाने के लिए दशोली विकासखंड के डिडोली में बंदरबाड़ा तैयार करने के लिए 11.7 हेक्टेयर भूमि की तलाश कर डीपीआर तैयार की जाएगी। पांच साल के प्रोजेक्ट पर चार करोड़ रुपये से अधिक की राशि व्यय होने का अनुमान है। इसके लिए केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण की अनुमति जरूरी होगी। योजना के तहत आबादी क्षेत्र से बंदरों को बंदरबाड़ा तक लाने के बाद विशेषज्ञ पशु चिकित्सकों की निगरानी में बधियाकरण की प्रक्रिया की जाएगी। जिसके बाद फिर से बंदरों को जंगल में छोड़ दिया जाएगा। साथ ही बंदरों को इस बाड़े में रखने के लिए संस्तुति जरूरी होगी।

केदारनाथ वन प्रभाग के तहत सर्वे के अनुसार चार हजार से अधिक बंदर की आबादी को चिह्नित किया गया है। यह संख्या अधिक भी हो सकती है। जनपद के अन्य वन क्षेत्रों में बंदरों की आबादी काफी ज्यादा है, जिससे आए दिन ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में फसलों को नुकसान पहुंच रहा है।

---

यह दीर्घकालीन योजना है। इसके लिए पांच साल का प्रोजेक्ट तैयार कर केंद्रीय चिडि़याघर प्राधिकरण को स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा। प्रथम चरण में भूमि सर्वे व चयन के बाद भूमि निरीक्षण एवं बंदरबाडे़ के लिए पशुचिकित्सक सहित कमचारियों को रहने का आवास, स्टोर व अन्य संसाधन जुटाए जाएंगे। इसके लिए नेशनल अथारिटी व जू वन्य जीव प्रभाग की टेक्निकल टीम का अनुमोदन जरूरी होगा, जबकि निर्माण बजट स्वीकृति के बाद संभव होगा। शीघ्र ही केदारनाथ वन प्रभाग की टीम बंदरबाड़ा निर्माण को चयनित भूमि का स्थलीय निरीक्षण करेगी।

-आइएस नेगी, डीएफओ केदारनाथ वन जीव प्रभाग गोपेश्वर

Edited By: Jagran