संवाद सूत्र, कर्णप्रयाग: एशियाड पदक विजेता एवं अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित सुरेंद्र सिंह कनवासी ने तंत्र की कार्यशैली से आहत होकर अर्जुन पुरस्कार लौटाने की बात कही है। इंटरनेट मीडिया पर अपनी पीड़ा बयां करते हुए कनवासी ने कहा कि उत्तर प्रदेश शासनकाल में उन्हें गौचर में आधा नाली (1080 वर्गफीट) भूमि आवंटित हुई थी, जिसे खाली करने का नोटिस दिया गया है। उधर, राजस्व विभाग के अनुसार ग्रामीणों की शिकायत पर निरीक्षण के दौरान लीज से ज्यादा भूमि पर अतिक्रमण पाया गया। इसी के बाद प्रशासन की ओर से नोटिस भेजा गया।

कर्णप्रयाग (चमोली) के ग्राम कोलसो निवासी सुरेंद्र सिंह कनवासी वर्ष 1981 में सेना में भर्ती हुए थे और वर्ष 2007 में बीईजी रुड़की से बतौर कैप्टन सेवानिवृत्त हुए। 1990 के बीजिंग एशियाड की नौकायन स्पर्धा में उन्होंने कांस्य पदक जीता। इसके बाद इसी वर्ष उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव की ओर से उन्हें गौचर में आधा नाली भूमि आवंटित की गई। वर्ष 2001 में उन्हें खेल क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार अर्जुन अवार्ड से भी नवाजा गया। सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद वर्ष 2007 में उन्होंने आवंटित भूमि पर डेढ़ करोड़ की लागत से दो मंजिला होटल का निर्माण कराया। इसके लिए उन्होंने वीर चंद्र सिंह गढ़वाली स्वरोजगार योजना के तहत 50 लाख का लोन भी लिया। अब प्रशासन की ओर से भूमि खाली करने का नोटिस मिलने से कनवासी काफी क्षुब्ध हैं।

इंटरनेट मीडिया पर अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कनवासी ने कहा कि जिस भूमि पर उन्होंने होटल बनवाया, प्रशासन उसे कब्जे की बता रहा है। जबकि, हकीकत में जिलाधिकारी चमोली के माध्यम से उन्हें यह भूमि आवंटित हुई थी। उधर, राजस्व उप निरीक्षक गौचर जगदीश चंद्र ओलिया ने कहा कि उक्त भूमि पर कब्जे की शिकायत स्थानीय ग्रामीणों की ओर से की गई थी। निरीक्षण में लीज से ज्यादा भूमि पर निर्माण हुआ पाया गया। जिसकी रिपोर्ट जिला प्रशासन को भेजी गई थी। इसी क्रम में उन्हें नोटिस जारी किया गया।

Edited By: Jagran