चतुर्थ केदार बाबा रुद्रनाथ के कपाट शीतकाल के लिए बंद, डोली गोपेश्वर रवाना
चमोली जिले में स्थित चतुर्थ केदार बाबा रुद्रनाथ के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए हैं। अब अगले ...और पढ़ें


समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
संवाद सहयोगी, गोपेश्वर। चमोली जिले में समुद्रतल से 11,808 फीट की ऊंचाई पर स्थित चतुर्थ केदार बाबा रुद्रनाथ शनिवार शाम 7:47 बजे शीतकाल के लिए समाधि में चले गए। अब छह माह बाबा की पूजा शीतकालीन गद्दीस्थल गोपीनाथ मंदिर गोपेश्वर में होगी। बाबा की उत्सव डोली रविवार सुबह धाम से गोपेश्वर के लिए रवाना होगी।
कपाट बंद करने के उत्सव को यादगार बनाने के लिए धाम में एक हजार से अधिक श्रद्धालु व हक-हकूकधारी मौजूद रहे। इससे पहले पुजारी व हक-हकूकधारी बुग्याली क्षेत्र से बुके (बुकले) के फूल लेकर धाम में पहुंचे। कपाट बंद करने की प्रक्रिया शाम पांच बजे शुरू हुई।
शीतकाल के लिए दी गई समाधि
कार्तिक सक्रांति पर सूर्य के तुला राशि में प्रवेश करने के साथ मुख्य पुजारी पं. हरीश भट्ट ने बाबा रुद्रनाथ को भोग लगाया। फिर बुके के फूलों से भगवान का शृंगार कर उन्हें शीतकाल के लिए समाधि दी गई। इस अवसर पर मनोज नेगी, पंकज नेगी, राम सिंह राणा सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
बाबा की उत्सव डोली यात्रा सुबह धाम से गोपेश्वर के लिए रवाना होगी और रात्रि विश्राम के लिए ग्वाड़ देवलधार पहुंचेगी। 19 अक्टूबर को डोली यहां से गोपीनाथ मंदिर में पहुंचेगी। रुद्रनाथ धाम में शिव के मुख दर्शन होते हैं। यहां बाबा प्राकृतिक गुफा में विराजमान में हैं। श्रद्धालुओं को यहां पहुंचने के लिए 19 किमी की कठिन चढ़ाई तय करनी पड़ती है।
