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मां नंदा देवी बड़ीजात: कैलाश विदाई पर उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, नम आँखों से भक्त कर रहे विदा

Published: Sat, 12 Sep 2026 02:52 PM (IST)

मां नंदा देवी बड़ीजात और लोकजात यात्रा अपने पड़ावों की ओर बढ़ रही है, जहां श्रद्धालु लोकगीतों और जागरों के ...और पढ़ें

बंड भूमियाल, मां नंदा की डोली छंतोली बंड क्षेत्र से अगले पड़ाव गौंणा गांव के लिए रवाना होते हुए। जागरण

बंड भूमियाल, मां नंदा की डोली छंतोली बंड क्षेत्र से अगले पड़ाव गौंणा गांव के लिए रवाना होते हुए। जागरण 

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जागरण संवाददाता, गोपेश्वर। जा मेरी गौरा जा तू शिव का कैलाश,जा मेरी गौरा तू, चौखम्भा उकाली.. मां नंदा को लोकगीतों और जागरों से श्रद्धालु एक गांव से दूसरे गांव के लिए विदा कर रहे हैं। एक सप्ताह से चल रही मां नंदा देवी बड़ीजात धीरे धीरे अपने अपने पड़ावों की ओर प्रस्थान कर रही है।

भादों की तपती धूप, चारों ओर हरियाली, खेतों में पकी फसलों में मां नंदा की डोली एक गांव से दूसरे गांव होते हुए अगले पड़ावों के लिए विदा हो रही है। अब मां नंदा की बड़ी जात में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ रहा है।

पड़ावों में मां नंदा के जयकारों से किसी भव्य और दिव्य लोकोत्सव का नजारा देखने को मिल रहा है। हर कोई मां नंदा की भक्ति में डूबा है मां नंदादेवी बड़ीजात यात्रा कार्यक्रम के तहत मां नंदा के कैलाश विदाई को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह है।

देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी श्रद्धालु इस यात्रा में शामिल हैं। मां नंदा देवी की बड़ीजात यात्रा पगना गांव से मां भगवती से मिलन व विदाई के बाद भोंधार चरबंग होते हुए 20 किमी की दूरी तय कर ल्वाणी गांव की ज्वलपा से मां नंदा का मिलन हुआ।

देव मिलन का यह दृश्य बेहद मामिZक था।पगना गांव में सुबह गौड़ ब्राह्मण मुंशी चंद्र गौड़, दिनेश गौड़, योगेश गौड़, मंशा गौड़, राकेश गौड़, किशोर गौड़, संजय गौड़ ने पूजा अर्चना की।

कल,आज ल्वाणी से सुंग बालाखाला,पाटाखाल होते हुए 15 किमी की दूरी तय कर रात्रि विश्राम रामणी गांव में होगी। यहां पर बंड भूमियाल, नंदा,जाख ,बदरीनाथ छंतोली मिलन होगा। मां नंदादेवी बड़ीजात यात्रा जैसे जैसे आगे बढ़ रही है। वैसे श्रद्धालुओं के काफीले के साथ उत्साह बढ रहा है।

नंगे पैर मां नंदा के जयकारे लोक जागरों की गूंज मानों यहां के गांव पंगडंडियां जंगल नंदामय हो गए हों। गांवों में मां नंदा की डोली छंतोली निशान, चौसिंग्या खाडू की पंचायती चौक में पूजा अर्चना कर स्थानीय देवी देवता भी अवतरित हुए सबने श्रद्धालुओं को आर्शीवाद दे रहे हैं।

इस अवसर पर नंदादेवी मंदिर समिति के अध्यक्ष सुखवीर रौतेला, नंदादेवी बड़ीजात आयोजन समिति के अध्यक्ष सेवानिवृत्त कर्नल हरेंद्र सिंह रावत सहित कई भक्त शामिल थे।

लोक जात यात्रा सातवें पड़ाव चेपड़ों गांव पहुंची

कुरुड़ नंदादेवी सिद्धपीठ मंदिर से पांच सितंबर को शुरु हुई मां नंदा राजराजेश्वरी की लोकजात यात्रा भी अपनी सातवें पड़ाव थराली के चेपड़ों गांव पहुंचने पर देवी भक्तों ने मां नंदा की डोली का पुष्प वर्षा कर भव्य स्वागत किया।

ढोल-दमाऊं की गूंज, मां नंदा के जयकारे और चारों ओर उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, शुक्रवार को थराली का नजारा देखते ही बन रहा था। मां नंदा लोकजात यात्रा के थराली पहुंचते ही हजारों श्रद्धालु मां नंदा की डोली के दर्शन और स्वागत के लिए उमड़ पड़े।

जगह-जगह डोली पर पुष्पवर्षा हुई और भक्तों ने श्रद्धा एवं भक्ति के साथ मां नंदा का आशीर्वाद लिया। सूना में रात्रि विश्राम के बाद शुक्रवार सुबह मां नंदा की डोली अगले पड़ाव के लिए रवाना हुई।

थराली गांव से होते हुए डोली थराली बाजार और राड़ीबगड़ चेपड़ों पहुंची। मां नंदा की डोली के नगर में पहुंचते ही श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर पहुंच गया। कल,आज मां राजराजेश्वर की डोली चेपड़ों से कोठी धारतल्ला पहुंचेगी।

गौंणा गांव पहुंची बंड की डोली

बंड की नंदा शुक्रवार को भूमियाल मंदिर कोंटा, किरूली गांव से पंछूला, भौंधार, भनाई, होते हुए रात्रि विश्राम के लिए गौणा गांव पहुंची है। शुक्रवार को बंड भूमियाल मंदिर कोंटा किरूली में बंड क्षेत्र के 12 ग्रामसभा के सैकड़ों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में बंड की नंदा डोली को अगले पड़ाव गौणा गांव के लिए विदा किया।

बंड नंदा डोली के साथ बंड भूमियाल की छंतोली और गेंदाणु देवता की छंतोली भी कैलाश रवाना हो गई है। ग्रामीणों और ध्याणियों ने पौराणिक लोकगीतों और जागर गाकर हिमालय की अधिष्टात्री देवी माँ नंदा को कैलाश के लिये विदा किया।

मेरी मैत की धियाणी तेरू बाटू हेरदू रोली, हेरि चे जा फेरी चे जा तु मैत कु मुल्क जा मेरी गौरा जा तू शिव का कैलाश, जा मेरी गौरा तू, चौखम्भा उकाली.. ध्याण को विदा करते समय महिलाओं की आंखे अश्रुओं से छलछला गयी।

खासतौर पर ध्याणियां मां नंदा की डोली को कैलाश विदा करते समय फफककर रो पड़ी। इस दौरान श्रद्धालुओं नें अपने साथ लाये खाजा- चूडा, बिंदी, चूडी, ककड़ी, मुंगरी भी समौण के रूप में माँ नंदा को अर्पित किये।

बंड नंदा डोली की विदाई के अवसर पर पुजारी अशोक गौड़, भूमियाल के पुजारी नरेंद्र खाती, गेंदाणु भगवान के पुजारी जगत सिंह नेगी बंड मंदिर समिति के अध्यक्ष जगत सिंह नेगी, सचिव रघुनाथ सिंह फर्स्वाण, संरक्षक शंभू प्रसाद सती, बंड मंदिर समिति के पूर्व अध्यक्ष अतुल शाह, पूर्व ज्येष्ठ प्रमुख अयोध्या प्रसाद हटवाल, राजेंद्र सिंह फर्स्वाण प्रदीप फर्स्वाण, संतोष फर्स्वाण, मुकेश फर्स्वाण, पंकज फर्स्वाण, लक्ष्मण सिंह चौहान सहित कई लोग शामिल थे।

कल,आज बंड की नंदादेवी की डोली गौंणा गांव से गौंणा डंडा, तड़कताल, विनायकधार होते हुए रात्रि विश्राम के लिए रामणी गांव पहुंचेगी।

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