संवाद सहयोगी, गोपेश्वर :

हेमकुंड यात्रा मार्ग पर हेमकुंड के पास अटलाकोटी में प्रस्तावित हेलीपैड पर निर्माण कार्य शुरू हो गया है। शासन ने हेलीपैड निर्माण स्थल की वन भूमि हस्तांतरण तक कार्यों का भुगतान न करने की शर्त लगाई है। वहीं, हेलीपैड निर्माण शुरू होते ही स्थानीय निवासी भी विरोध में उतर गए हैं और उप जिलाधिकारी के माध्यम से शासन को ज्ञापन भेजा है।

हेमकुंड यात्रा मार्ग पर हेमकुंड साहिब में हेलीपैड नहीं होने से यहां पर वीआइपी, वीवीआइपी को बेस कैंप घांघरिया के हेलीपैड में ही उतर कर यहां से पैदल पांच किमी यात्रा करनी पड़ती है। आपदा के समय रेस्क्यू के लिए भी घांघरिया हेलीपैड का इस्तेमाल होता है। सरकार ने राज्य योजना के अंतर्गत हेमकुंड यात्रा मार्ग पर हेमकुंड से एक किमी नीचे अटलाकोटी में रेस्क्यू हेलीपैड की स्वीकृति देते हुए 225.46 लाख रुपये की वित्तीय एंव प्रशासकीय स्वीकृति दी है। इस निर्माण के लिए शासन स्तर पर लोनिवि को प्रथम किस्त के रूप में 90.84 लाख रुपये भी आवंटित कर दिए गए। यह भी कहा गया है कि जब तक वन भूमि हस्तांतरण नहीं होती तब तक इस राशि का व्यय नहीं किया जाए। हालांकि शासन स्तर से प्रस्तावित भूमि पर जीओ टैगिंग कर निर्माण कार्य प्रारंभ करने को कहा गया है। लोनिवि ने वन विभाग द्वारा कार्य रोके जाने के बाद शासन के आदेशों के तहत कार्य शुरू करा दिया है।

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देवदर्शनी धार रेस्क्यू हेलीपैड के लिए उपयुक्त

= देवदर्शनी धार में रेस्क्यू हेलीपैड का संचालन होता है तो ग्रामीणों को नहीं कोई आपत्ति

= कहा, अभी जिस जगह हेलीपैड बनाया जा रहा वह विश्व धरोहर फूलों की घाटी के क्षेत्र में आता है संवाद सूत्र, जोशीमठ : पुलना भ्यूंडार के ग्रामीणों ने अटलाकोटी सामलागाड़ में बनने वाले रेस्क्यू हेलीपैड का पुरजोर विरोध किया है। ग्रामीणों ने मामले में नंदादेवी राष्ट्रीय पार्क के वनाधिकारी व उपजिलाधिकारी को ज्ञापन दिया है। ज्ञापन में कहा गया कि घांघरिया से पांच किमी ऊपर सीढ़ी बैंड में लोनिवि द्वारा एक रेस्क्यू हेलीपैड का निर्माण कार्य चल रहा है। जिसको लेकर ग्रामीणों को घोर आपत्ति है। दो दशक पहले हेमकुंड गुरुद्वारा के पास जहां पर सीढ़ी मार्ग समाप्त होता है देवदर्शनी धार में एक हेलीपैड का निर्माण किया जा चुका है। पूर्व में केंद्रीय मंत्री रहे सरदार बूटा सिंह सहित अन्य वीआइपी हेलीकाप्टर से हेमकुंड की सैर कर चुके हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह स्थान रेस्क्यू हेली के लिए सबसे उपयुक्त है। परंतु इस स्थान में वर्तमान समय में गेट निर्माण होने से हेलीपैड के लिए उपयोग नहीं हो पा रहा है। ग्रामीणों ने कहा कि अगर इस स्थान पर रेस्क्यू हेलीपैड का संचालन होता है तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। ज्ञापन में कहा गया कि अभी जिस जगह हेलीपैड बनाया जा रहा वह विश्व धरोहर फूलों की घाटी के क्षेत्र में आता है, यहां पर दोनों ओर से विशाल ग्लेशियर हैं और आपदा की दृष्टि से अति संवेदनशील क्षेत्र है। यहां पर बड़ी आपदा आती रही है। इस क्षेत्र में वन्य जीव जंतु और वनस्पति पाई जाती है। जिसमें ब्रह्मकमल, फैन कमल, ब्लू पापी मासी, टगर, पापी, मास, हमारू, नेरू, कटुकी सहित कई तरह की दुर्लभतम प्रजाति के फूल और जड़ी-बूटी पाई जाती है। इसके अलावा मोनाल, कस्तूरी मृग, हिम तेंदुआ, हिमालयन ब्लैक बेयर, स्नो काक सहित अन्य दुर्लभतम प्रजाति के वन्य जीव जंतुओं का प्राकृतिक आवास है। किसी प्रकार का निर्माण यहां की जैव विविधता को खतरा पैदा कर सकता है। ग्रामीणों ने कहा कि अगर कार्य बंद नहीं किया गया तो वे आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। ज्ञापन में प्रधान शिवराज चौहान, वन पंचायत सरपंच संजय चौहान, महिला मंगल दल अध्यक्ष यशोदा देवी, व्यापार मंडल अध्यक्ष घांघरिया गिरीश चौहान, सहित कई लोगों के हस्ताक्षर हैं।

Edited By: Jagran