राज्य ब्यूरो, देहरादून। उत्तराखंड के चमोली जिले की मलारी घाटी के बाड़ाहोती चारागाह में एक बार फिर चीनी सैनिक देखे जाने की बात सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि बीती 30 अगस्त को चीनी सैनिक इस चारागाह में घुस आए और करीब तीन घंटे बाद लौट गए। इनमें से कुछ सैनिक घोड़ों पर भी सवार थे। इस दौरान उन्होंने भेड़ पालकों के लिए होती नदी पर बनी अस्थाई पुलिया भी तोड़ दी। चमोली के जिलाधिकारी हिमांशु खुराना ने इस पर कोई भी टिप्पणी करने से इन्कार कर दिया, जबकि पुलिस अधीक्षक यशवंत ङ्क्षसह चौहान ने कहा कि पुलिस का बाड़ाहोती क्षेत्र में कोई तंत्र मौजूद नहीं है। ऐसे में उन्हें इस बारे में जानकारी नहीं है।

पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास चीनी सैनिकों के टेंट लगाने की खबरों के बीच उत्तराखंड में भी सीमा पर चीनी सैनिकों की सक्रियता बनी हुई है। इसी वर्ष जुलाई में चीनी सेना की एक प्लाटून बाड़ाहोती के पास सीमा पर नजर आई थी। इन दिनों बाड़ाहोती में भेड़पालक मौजूद हैं। बताया जा रहा है कि पिछले माह करीब 60 से 70 चीनी सैनिक चारागाह में घुस गए और काफी देर तक घूमते रहे। उनके लौटने के बाद भेड़पालकों ने रिमखिम स्थित आइटीबीपी की चौकी में इसकी सूचना दी। इसके बाद आइटीबीपी के जवानों ने बाड़ाहोती का जायजा भी लिया। दूसरी ओर अपर मुख्य सचिव (गृह) आनंद वर्द्धन ने बताया कि उन्हें अभी तक ऐसी जानकारी नहीं मिली है।

उत्तराखंड में चीन से सटी 345 किमी लंबी सीमा काफी संवेदनशील मानी जाती है। इसमें से 100 किलोमीटर लंबी सीमा चमोली जिले में है। बाड़ाहोती में चीनी सेना पहले भी कई बार अतिक्रमण करती रही है। चीनी सेना की गतिविधियों पर सेना और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल की पैनी निगाह रहती है। पिछले वर्ष लद्दाख में चीन के साथ तनाव के बाद से उत्तराखंड से लगी सीमा पर भी जवानों की संख्या बढ़ा दी गई है।

यह भी पढ़ें- उत्तराखंड में एलएसी पर चीनी सेना की सक्रियता बढ़ी, बाड़ाहोती के पास देखे गए चीनी सैनिक

Edited By: Raksha Panthri