संवाद सहयोगी, गोपेश्वर: समुद्रतल से 15225 फीट की ऊंचाई पर चमोली जिले में स्थित गुरुद्वारा हेमकुंड साहिब आज सुबह 9:30 बजे श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए जाएंगे। इससे पूर्व, सुबह नौ बजे लोकपाल लक्ष्मण मंदिर के कपाट खोले जाएंगे। इसके लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। गुरुद्वारा साहिब व लोकपाल लक्ष्मण मंदिर की लाइटिंग व फूलों से भव्य सजावट की गई है। पंज प्यारों की अगुआई में शनिवार सुबह गोविंदघाट से चला श्रद्धालुओं का जत्था भी रात्रि प्रवास के लिए घांघरिया पहुंच गया। आज कपाट खुलने से पूर्व जत्था हेमकुंड साहिब पहुुंच जाएगा। जत्थे में तीन हजार से अधिक संगत शामिल हैं।

जत्थे को पंजाब व गढ़वाल स्काउट के बैंड की मधुर लहरियों के बीच गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब मैनेजमेंट ट्रस्ट के अध्यक्ष जनक सिंह, उपाध्यक्ष नरेंद्रजीत सिंह बिंद्रा व श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के उपाध्यक्ष किशोर पंवार ने रवाना किया। जत्थे में उत्तर प्रदेश, पंजाब व दिल्ली समेत अन्य प्रांतों की संगत शामिल हैं। ट्रस्ट के उपाध्यक्ष नरेंद्रजीत सिंह बिंद्रा ने बताया कि पूरे यात्राकाल के लिए हेमकुंड साहिब में लंगर की व्यवस्था की गई है। घांघरिया व गोविंदघाट में भी लंगर सेवा उपलब्ध रहेगी। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए घांघरिया के एक किमी क्षेत्र में स्ट्रीट लाइट लगाई गई हैं। वहीं, भ्यूंडार के ग्रामीणों सहित श्रद्धालुओं की मौजूदगी में सुबह नौ बजे लोकपाल लक्ष्मण मंदिर के कपाट खोले जाएंगे।

---------------------

कपाटोद्घाटन के कार्यक्रम

- पंज प्यारों की अगुआई में सुबह छह बजे घांघरिया से हेमकुंड साहिब के लिए रवाना होंगी संगत

- पंज प्यारों की अगुआई में सुबह 9:30 बजे कपाट खुलने के बाद दरबार साहिब में सुशोभित होंगे गुरु ग्रंथ साहिब

- सुबह दस बजे पाठ श्री सुखमणि साहिब और सुबह 10:30 बजे होंगे सबद-कीर्तन

- दोपहर 12:30 बजे होगी इस साल की पहली अरदास

- दोपहर एक बजे लिया जाएगा हुक्मनामा

------------------------

दो साल बाद भ्यूंडार घाटी में लौटी रौनक

दो साल बाद अपने भव्य स्वरूप में शुरू हो रही हेमकुंड साहिब की यात्रा को लेकर भ्यूंडार घाटी में उल्लास का माहौल है। घाटी के ग्रामीण गोविदघाट से लेकर हेमकुंड साहिब के बेस कैंप घांघरिया तक होटल-ढाबा, घोड़ा-खच्चर व डंडी-कंडी समेत अन्य व्यावसायिक गतिविधि संचालित करते हैं। हालांकि, हेमकुंड साहिब पैदल मार्ग पर शीतकाल के दौरान क्षतिग्रस्त शौचालयों की अभी मरम्मत नहीं हो पाई है। इससे श्रद्धालुओं को परेशानियां झेलनी पड़ सकती हैं।

Edited By: Jagran