संवाद सहयोगी, गोपेश्वर: सरकार की गरीबों के लिए प्रधानमंत्री आवास सहित अन्य सुविधाओं को लेकर कई योजनाएं संचालित हो रही हैं। बावजूद इसके दशोली विकास खंड के डुंगरी गांव की विधवा सुनीता देवी अपनी तीन बेटियों के साथ जर्जर मकान पर रहने को मजबूर हैं। एक दशक बाद भी उन्हें आवास नहीं मिल सका है। आवास न मिलने से वह बारिश के बीच क्षतिग्रस्त घर में ही डेरा डाले रतजगा करने को मजबूर हैं।

गोपेश्वर से मात्र 13 किलोमीटर की दूरी पर स्थित डुंगरी गांव की 45 वर्षीय सुनीता के पति किशन सिंह का 16 साल पहले आकस्मिक निधन हो गया था। घर के मुखिया की मौत के बाद सुनीता का परिवार अभावों में पल रहा है। सुनीता की तीन बेटियां हैं। बड़ी बेटी 16 वर्षीय बबली 11वीं, 14 वर्षीय लवली 10 वीं व 12 वर्षीय रश्मि नौवीं कक्षा में पढ़ रही है। सुनीता का पुश्तैनी मकान जर्जर हालत में पहुंच गया है। मकान की छत और दीवारें क्षतिग्रस्त हैं। बारिश में घर के अंदर कमरे जलमग्न होना आम बात है। सुनीता देवी गांव में मेहनत, मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण कर रही है। सुनीता का कहना है कि वर्ष 2009 में दशोली विकासखंड में इंदिरा आवास के लिए आवेदन किया था। तब से अब तक कई बार प्रधानमंत्री आवास के लिए आवेदन कर चुकी हैं। मुख्यमंत्री को भी अपनी स्थिति बताने के लिए बेटियों से पत्र लिखवाकर भेज चुकी हैं, परंतु सुनवाई नहीं हो रही। अब तो मकान की स्थिति इतनी खराब है कि कभी भी गिर सकता है।

सहायक खंड विकास अधिकारी दशोली मोहन जोशी का कहना है कि सुनीता देवी का नाम आवास सूची में दर्ज है। लेकिन बजट न मिलने के कारण आवास निर्माण के लिए धनराशि जारी नहीं की गई। बजट आवंटन होते ही आवास योजना में भवन निर्माण के लिए धनराशि दे दी जाएगी। जिलाधिकारी स्वाति एस भदौरिया का कहना है कि प्रधानमंत्री आवास योजना में जिले से आठ हजार आवेदनों को आनलाइन भेजा गया था, जिसमें से पात्र पांच हजार से अधिक व्यक्तियों का चयन हो चुका है। अभी चयनित व्यक्तियों को भवन निर्माण के लिए धन आवंटन नहीं हुआ है। जिलाधिकारी ने कहा कि संबंधित ग्रामीण महिला के मसले पर वे जानकारी लेकर हरसंभव मदद करेंगी।

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