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चमोली के कपीरीपट्टी में फिर भड़की जंगल की आग, बारिश ने दी राहत

Published: Tue, 28 Apr 2026 11:49 PM (IST)

चमोली के कपीरीपट्टी के जंगलों में तीसरी बार भीषण आग लगी, जिससे वन संपदा को भारी नुकसान हुआ और वातावरण दूषित हो गया।

सोमवार रात कर्णप्रयाग के नाकोट और इससे लगे जंगलों में धधकी आग। जागरण

सोमवार रात कर्णप्रयाग के नाकोट और इससे लगे जंगलों में धधकी आग। जागरण

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संवाद सूत्र, सिमली (चमोली)। कर्णप्रयाग विकासखंड के कपीरीपट्टी के कई गांवों में तीसरी बार लगी आग ने वन संपदा को खासा नुकसान पहुंचाया है।

बीते दिन पहले जंगलों में लगी आग रिमझिम बारिश के बाद शांत हो गई थी, लेकिन एक बार फिर से भड़की आग से चारों ओर धुआं फैल गया है, जिससे सोमवार रातभर वातावरण दूषित रहा। हालांकि शाम को हुई वर्षा से जंगलों की आग बुझ गई। इससे आम लोगों के साथ ही वन विभाग ने भी राहत महसूस की।

नाकोट, बसक्वाली, रैखाल और तिमली गैर के जंगलों में भीषण आग ने आबादी की ओर बढ़ने का खतरा उत्पन्न कर दिया था। आग के कारण पहाड़ियों से पत्थर गिर रहे हैं और पेयजल स्रोत दूषित हो रहे हैं, जिससे घरों तक गंदा पानी पहुंच रहा है।

सामाजिक कार्यकर्ताओं विनोद खंडूड़ी, शोभित कुमार और गौरव कुमार ने कहा कि वन विभाग की नजरों से दूर अराजकतत्वों द्वारा आग लगाने की घटनाएं बढ़ रही हैं।

इसके अलावा कालेश्वर, लंगासू, नंदप्रयाग, आटागाड रेंज और नागनाथ रेंज के जंगल भी दो बार जल चुके हैं। वन सुरक्षा को लेकर वन महकमा सालभर जागरूकता कार्यक्रम, वन पंचायत सरपंच संगठन की बैठक और नुक्कड़ नाटकों पर लाखों रुपये खर्च करता है, लेकिन वन संपदा के नष्ट होने से वन्य जीवों का रुख आबादी की ओर हो रहा है।

साथ ही जल चुके पेड़ों के गिरने का खतरा और बरसात के दौरान भूस्खलन की संभावनाएं भी बढ़ गई हैं।

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