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संवाद सूत्र, बदरीनाथ: बीएसएफ (सीमा सुरक्षा बल) में ड्यूटी के दौरान दिव्यांग हुए जवान और अफसर बीएसएफ व आदित्य मेहता फाउंडेशन हैदराबाद के सहयोग से उच्च हिमालय के सतोपंथ क्षेत्र में एवरेस्ट आरोहण का प्रशिक्षण लेंगे। समुद्रतल से 12 से 16 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित यह क्षेत्र चीन सीमा से लगा हुआ है। प्रशिक्षित जवानों को वर्ष 2020 में एवरेस्ट अभियान पर रवाना होना है। प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ रविवार को बदरीनाथ में बीएसएफ के महानिदेशक केके शर्मा ने फ्लैग दिखाकर किया। इस मौके पर डीजी ने भगवान बदरी विशाल के दर्शन भी किए।

ड्यूटी के दौरान दिव्यांग हुए जवान और अफसरों का उपयोग सीमा क्षेत्र में चौकसी के लिए कम ही हो पाता है। इसलिए बीएसएफ ने अब इन दिव्यांग जवानों को पर्वतारोहण सहित उच्च हिमालयी क्षेत्रों में रहने-चढ़ने का प्रशिक्षण देने का निर्णय लिया है। ताकि पूरी तरह फिट होकर वे दोबारा सीमा की सुरक्षा में योगदान कर सकें। इस कार्य में आदित्य मेहता फांउडेशन हैदराबाद बीएसएफ का सहयोग कर रहा है। फांउडेशन ने प्रशिक्षण के लिए चीन सीमा से लगे सतोपंथ क्षेत्र को चुना है।

इसके तहत दिव्यांग जवानों को सतोपंथ क्षेत्र में दुर्गम पहाड़ी रास्तों पर बर्फ के बीच प्रशिक्षित किया जाएगा। प्रशिक्षण के दौरान ये जवान 2020 के एवरेस्ट अभियान के लिए खुद को तैयार करेंगे। बीएसएफ के महानिदेशक केके शर्मा ने बदरीनाथ स्थित गढ़वाल स्काउट के परिसर से इस दल को मिशन के लिए रवाना किया। इस मौके पर कमांडेंट आरके नेगी, चीफ इंस्ट्रक्टर मनोज पैन्यूली, डिप्टी कमांडेंट हरीश चंद्र पैन्यूली, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. लक्ष्मण ¨सह, डॉ. आशा, कोतवाल अनिल जोशी आदि मौजूद थे।

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पहली बार दिया जा रहा ऐसा अनूठा प्रशिक्षण

दल में बीएसएफ के चार दिव्यांग जवान व आदित्य फांउडेशन के निदेशक आदित्य के अलावा 20 सदस्य शामिल हैं। महानिदेशक के अनुसार ऐसा पहली बार हो रहा है, जब बल के दिव्यांग जवानों को शारीरिक एवं मनोवैज्ञानिक रूप से पर्वतारोहण सहित उच्च हिमालयी क्षेत्र में साहसिक पर्यटन के लिए फिट किया जा रहा है।

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स्वयं भी दिव्यांग हैं आदित्य

प्रशिक्षण देने के लिए बदरीनाथ पहुंचे आदित्य मेहता फांउडेशन के निदेशक आदित्य ने कहा कि वे भी स्वयं भी दिव्यांग हैं। उन्हें खुशी है कि वह जवानों को प्रशिक्षित कर उनके मन में फिर से जोश भरने का कार्य कर रहे हैं।

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जोश एवं जज्बे से भरे हैं जवान

प्रशिक्षण के लिए चुने गए बीएसएफ के जवान अजय सिंह दोनों पैर से दिव्यांग है। ड्यूटी के दौरान वे अपने पैर गंवा बैठे थे। कहते हैं, 'मुझे बीएसएफ ने दोबारा प्रशिक्षित होने का मौका दिया है, जो मेरे लिए नया जीवन मिलने जैसा है।' इसी तरह बीएसएफ के दिव्यांग जवान अमर कुमार संतरा तैराकी में राष्ट्रीय स्तर पर कई मेडल जीते चुके हैं। कहते हैं, 'यह अभियान मेरे भीतर नया जोश भरेगा।' अभियान में बीएसएफ के जवान एम.वैंकटेश भी शामिल हैं, जो कश्मीर में आतंकवादियों के खिलाफ चलाए एक ऑपरेशन के दौरान दोनों पैर, गले व दाहिने हाथ में गोली लगने से दिव्यांग हो गए थे। कहते हैं, 'देश सेवा के लिए यह अभियान मेरे लिए वरदान से कम नहीं।' जवान के.जगन्नाथ के लिए भी यह अभियान जीवन में बहुत मायने रखता है। कहते हैं, 'दुर्घटना में घायल होने के बाद मुझे जीवन बेकार लगने लगा था। इस प्रशिक्षण ने मेरे भीतर नए उत्साह का संचार किया है।'

Posted By: Jagran