बदरीनाथ चढ़ावे में हेराफेरी: उत्तर प्रदेश के दौर में गुलजार, अब वीरान पड़ा है BKTC का मुख्य कार्यालय
ज्योतिर्मठ स्थित बदरी-केदार मंदिर समिति का मुख्य कार्यालय वीरान पड़ा है, जबकि अधिकारी-कर्मचारी देहरादून व ऋषिकेश से यात्रा व्यवस्थाएं संभाल रहे हैं।

ज्योतिर्मठ में मंदिर समिति का मुख्य कार्यालय। जागरणा
HighLights
ज्योतिर्मठ स्थित बीकेटीसी का मुख्य कार्यालय वीरान पड़ा
अधिकारी-कर्मचारी देहरादून, ऋषिकेश से कर रहे संचालन
समिति वित्तीय गड़बड़ियों के आरोपों से भी घिरी है
देवेंद्र रावत, गोपेश्वर। ज्योतिर्मठ के नृसिंह मंदिर परिसर स्थित बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) का मुख्य कार्यालय वीरान पड़ा है।
जबकि, उत्तर प्रदेश के दौर में यह कार्यालय न सिर्फ गुलजार रहता था, बल्कि समिति के अध्यक्ष हों या अधिकारी-कर्मचारी वर्षभर यहां रहकर धाम की व्यवस्थाओं में जुटे रहते थे।
आज वह समिति के देहरादून व ऋषिकेश स्थित कार्यालयों में जमे हुए हैं। जबकि, भगवान बदरी विशाल का खजाना ज्योतिर्मठ कार्यालय में ही रहता है।
उत्तराखंड राज्य गठन के बाद समिति के अधिकारियों ने पहले देहरादून के कारगी और फिर राजपुर रोड पर आलीशान कार्यालय खोले।
इसके साथ ही अधिकारियों की सेवा में कर्मचारियों ने भी यहां रूख किया और अब देहरादून व ऋषिकेश में ही रहकर यात्रा व्यवस्थाओं को देखा जा रहा है। इसके चलते अधिकारियों का ज्योतिर्मठ आना भी कम हो गया। जाहिर है इसका असर यात्रा व्यवस्थाओं पर तो पड़ना ही था।
हालांकि, स्थानीय लोगों के विरोध के बाद पिछले कार्यकाल में तत्कालीन अध्यक्ष अजेंद्र अजय के नेतृत्व वाली समिति ने ज्योतिर्मठ से ही प्रधान कार्यालय संचालित करने का निर्णय लिया। इस दौरान देहरादून-ऋषिकेश में डटे कर्मचारी भी यहां भेजे गए।
लेकिन, वर्तमान में फिर स्थित यथावत हो गई है। पूर्व में यात्राकाल के दौरान ऋषिकेश में सिर्फ प्रचार कार्यालय होता था, लेकिन अब ऋषिकेश-देहरादून से ही समिति की गतिविधियां संचालित हो रही हैं। इससे स्थानीय जनता और तीर्थ पुरोहितों में भारी नाराजगी है।
ऋषिकेश कार्यालय भी विवाद में
बीकेटीसी वित्तीय गड़बड़ियों के आरोपों से भी घिरी है। विवाद में ऋषिकेश स्थित ट्रांजिट कैंप में बना कार्यालय भी शामिल है। इस कार्यालय को तैयार करने में 68 लाख की लागत आई है और इसके संचालन को समिति हर महीने 60 हजार से अधिक की रकम किराये पर ही खर्च करती है।
इसमें बिजली-पानी का भारी-भरकम बिल भी शामिल है। हालांकि, इसका राशि का वहन एक दानी भक्त करते हैं। कार्यालय की उपयोगिता पर मंदिर समिति के अपने तर्क हैं। मसलन चारधाम यात्रा परिसर में कार्यालय खुलने से यात्रियों को सुविधाएं मिली हैं।
ऋषिकेश कैंप कार्यालय सरकारी भवन में ही खोला गया है। इसका कार्यालय का किराया प्रतिमाह 50 हजार रुपये जाता है, जो पर्यटन विभाग को दिया जाता है। मंदिर समिति भी पर्यटन विभाग के अधीन ही है। कार्यालय में श्रद्धालुओं को यात्रा संबंधी जानकारी सुलभता से पहुंचाई जा रही है।
- सोहन सिंह रांगड़, सीईओ, बदरी-केदार मंदिर समिति
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