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बदरीनाथ धाम में सांस्कृतिक कार्यक्रम पर गुस्सा बरकरार, पुरोहित महापंचायत ने उठाए सवाल

Published: Fri, 25 Sep 2026 01:14 PM (IST)

बदरीनाथ धाम में सांस्कृतिक कार्यक्रम को लेकर विवाद जारी है, उत्तराखंड चार धाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत ने कार्यक्रम के स्वरूप पर नाराजगी जताई है।

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संवाद सहयोगी, गोपेश्वर। बदरीनाथ धाम में आयोजित ‘देवभूमि कल्चरल फेस्टिवल-2026’ के सांस्कृतिक कार्यक्रम को लेकर चल रहा विवाद अभी थम नहीं पाया है। उत्तराखंड चार धाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों के स्वरूप और प्रस्तुति को लेकर नाराजगी व्यक्त की है।

महापंचायत का कहना है धाम की धार्मिक और पौराणिक मान्यताओं को ध्यान में रख कर कार्यक्रमों किए जाने चाहिए। संगीत के माध्यम से शोर उत्पन्न करना धाम की धार्मिक गरिमा के अनुरूप नहीं है। उधर, जिला प्रशासन का कहना है कि सेना के स्थानीय अधिकारियों को धाम की धार्मिक आस्था, पौराणिक-आध्यात्मिक महत्व और स्थानीय धार्मिक परंपराओं के अनुरूप ही आयोजन कराने की सलाह दी थी।

सेना की ओर से प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी बदरीनाथ स्थित टूरिस्ट अराइवल प्लाजा में दो दिवसीय ‘देवभूमि कल्चरल फेस्टिवल-2026’ का आयोजन किया गया। महोत्सव की थीम ‘हमारी विरासत, हमारा भविष्य’थी। आयोजन का उद्देश्य क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, स्थानीय परंपराओं और प्रतिभाओं को मंच प्रदान करने के साथ ही सीमांत क्षेत्रों में पर्यटन एवं सांस्कृतिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करना था।

सेना के अनुरोध पर जिला प्रशासन ने विभिन्न जनोपयोगी एवं जनकल्याणकारी योजनाओं से संबंधित स्टाल लगाए थे। फेस्टिवल में नाच-गाने को लेकर सवाल उठे थे। सामाजिक संगठनों ने कुछ गायकों की प्रस्तुति पर आपत्ति जताते हुए इसे बदरीनाथ धाम की मर्यादा के विरुद्ध बताया है। उनका आरोप था कि कुछ गायकों ने फूहड़ता का प्रदर्शन किया।

इंटरनेट मीडिया पर भी यह मामला तेजी से प्रसारित होता रहा। गुरुवार को जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया कि आयोजन के दौरान प्रस्तुत किए गए विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों, प्रस्तुतियों तथा उनके स्वरूप का चयन और निर्धारण सेना द्वारा किया गया था। कार्यक्रम के दौरान वाइब्रेंट विलेज योजना के अंतर्गत चयनित सीमांत गांवों बामणी, माणा की समृद्ध लोक संस्कृति, पारंपरिक रीति-रिवाजों और स्थानीय परंपराओं को दर्शाती सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दी गईं।

प्रशासन की अपील
प्रशासन ने जनसामान्य से अपील की है कि इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित किसी भी सूचना अथवा पोस्ट के आधार पर बिना तथ्यों की पुष्टि किए किसी प्रकार की धारणा न बनाएं। किसी भी सूचना को साझा करने से पूर्व उसके तथ्यों की पुष्टि अवश्य करें। साथ ही भ्रामक और तथ्यहीन प्रचार-प्रसार से बचें।

सवाल कार्यक्रम के उद्देश्य को लेकर नहीं, बल्कि उसके स्वरूप और प्रस्तुति को लेकर है। बदरीनाथ धाम में शंख की ध्वनि को लेकर धार्मिक मान्यताएं जुड़ी हुई हैं। ऐसे में संगीत के माध्यम से शोर उत्पन्न करना धाम की धार्मिक गरिमा के अनुरूप नहीं है।
-डा. बृजेश सती, महासचिव, उत्तराखंड चार धाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत