उत्तराखंड: प्राकृतिक खेती से जुड़े सवाल पर फिर उलझे कृषि मंत्री गणेश जोशी
उत्तराखंड विधानसभा में कृषि मंत्री गणेश जोशी ने प्राकृतिक खेती पर स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि 11 जिलों में 10,000 हेक्टेयर में प्राकृतिक खेती शुरू हुई है।

कृषि मंत्री गणेश जोशी।

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राज्य ब्यूरो, गैरसैंण (चमोली)। विधानसभा के बजट सत्र में शुक्रवार को प्रश्नकाल के दौरान उत्तराखंड में प्राकृतिक खेती से जुड़े सवाल पर कृषि मंत्री गणेश जोशी एक बार फिर उलझे।
यद्यपि, काफी देर बाद उन्हाेंने साफ किया कि टिहरी व रुद्रप्रयाग को छोड़कर शेष 11 जिलों के 10,000 हेक्टेयर क्षेत्रफल में इसी रबी सत्र से प्राकृतिक खेती शुरू की गई है।
इससे कुल कितना उत्पादन हुआ, इसे लेकर अप्रैल में फसल कटने के बाद तस्वीर साफ होगी।
बता दें कि विधानसभा के पिछले सत्र में विधायक बृजभूषण गैरोला की ओर से लगाए गए इस प्रश्न के आलोक में प्राकृतिक व जैविक खेती में अंतर से संबंधित प्रश्नो पर मंत्री जोशी उलझे थे।
तब इस प्रश्न को स्थगित कर दिया गया था, जिसे इस बार शामिल किया गया।
प्रश्नकाल के दौरान विधायक प्रीतम सिंह ने अनुपूरक प्रश्न पूछा कि प्राकृतिक खेती से कितना उत्पादन हो रहा है। इस पर मंत्री ने जवाब दिया कि 10 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में उत्पादन हो रहा है।
बाद में संसदीय कार्यमंत्री ने भी हस्तक्षेप किया और फिर काफी देर बाद कृषि मंत्री ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि टिहरी व रुद्रप्रयाग जिलों का क्षेत्रफल शत-प्रतिशत जैविक होने के कारण इन्हें प्राकृतिक खेती से बाहर रखा गया है।
उन्होंने कहा कि राज्य में कृषि उत्पादों के विपणन के लिए 337 आउटलेट स्थापित किए गए हैं। अप्रैल से इनमें प्राकृतिक खेती के उत्पादों की बिक्री भी होगी। प्राकृतिक खेती से संबंधित यह मूल प्रश्न विधायक गैरोला का था। उनके अलावा विधायक विनोद कंडारी ने अनुपूरक प्रश्न उठाए।
वन्यजीवों से फसल सुरक्षा को घेरबाड़ योजना में केंद्र ने स्वीकृत किए 25 करोड़
राज्य में वन्यजीवों से फसल सुरक्षा के दृष्टिगत घेरबाड़ योजना के लिए केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत 25 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की है।
इसके अलावा राज्य के बजट में 10 करोड़ का प्रविधान किया गया है। कृषि मंत्री जोशी ने विधायक बृजभूषण गैरोला, राम सिंह कैड़ा, मनोज तिवारी के प्रश्नों के उत्तर में यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि पिछले तीन साल में 44,429 किसानों को जिला योजना के माध्यम से घेरबाड़ का लाभ दिया गया। इससे 2841 हेक्टेयर में हुई घेरबाड़ पर 47.54 करोड़ रुपये खर्च हुए।
कृषि को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने पर विचार करेगी सरकार
कृषि मंत्री ने सदन में कहा कि कृषि विषय को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने के प्रस्ताव पर सरकार विचार करेगी।
उन्होंन विधायक सुरेश गढ़िया व संजय डोभाल के प्रश्नों के उत्तर में यह जानकारी दी। साथ ही पिछले वर्ष राज्य में चले विकसित कृषि अभियान का ब्योरा भी रखा। यद्यपि, इस कार्यक्रम से कितने किसानों की आय में वृद्धि हुई, इसका जवाब विधायकों को नहीं मिला।
मानकों में शिथिलता को केंद्र से करेंगे अनुरोध
कृषि मंत्री ने सदन को बताया कि पिछले वर्ष आपदा से राज्य में 13,291.148 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फसलों को क्षति पहुंची।
केंद्र सरकार के तय मानकों के अनुसार 33 प्रतिशत से अधिक फसल क्षति पर प्रभावित किसानों को मुआवजा देने का प्रविधान है। अभी तक 8723 किसानों और 1813 बागवानों को मुआवजा प्रदान किया जा चुका है।
उन्होंने यह भी कहा कि राज्य की विषम परिस्थितियों को देखते हुए फसल क्षति के मानकों में शिथिलता के लिए केंद्र सरकार से अनुरोध किया जाएगा।
यह भी बताया कि बादल फटने अथवा बाढ़ से खेतों के बहने या मलबा आने पर इसके लिए प्रति हेक्टेयर के हिसाब से मुआवजा दिया जाता है।
उन्हाेंने विधायक बृजभूषण गैरोला, विनोद चमोली, वीरेंद्र कुमार के प्रश्नों के उत्तर में यह जानकारी दी। साथ ही फसल बीमा के प्रतिपूर्ति दावों का ब्योरा भी रखा।
उत्तरकाशी में दोबारा सर्वे कराने के दिए गए निर्देश
कृषि मंत्री ने बताया कि उत्तरकाशी जिले के हर्षिल, पुरोला, नौगांव, सांकरी समेत अन्य क्षेत्रों में ओलावृष्टि से सेब की फसलों को पहुंचे नुकसान के दृष्टिगत बीमा कंपनी को दोबारा से सर्वे कराने के निर्देश दिए गए हैं।
इसके पीछे मंशा यही है कि क्षतिपूर्ति के दावों के भुगतान के मानक एक जैसे हों। इससे पहले विधायक दुर्गेश्वरलाल ने इन क्षेत्रों में बीमा भुगतान के मामले में अंतर को रेखांकित किया था।
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