संवाद सहयोगी, गोपेश्वर: चमोली जिले में ईराणी, झींझी और बनाला गांवों के 1300 ग्रामीण बीते तीन दिन से गांव में ही फंसे हैं। गांवों की आवाजाही का एकमात्र साधन वीरगंगा नदी पर बना लकड़ी का पुल नदी के तेज बहाव में बह गया है। नदी को पार करने का अन्य कोई साधन नहीं है। इसके चलते ग्रामीणों को समस्या हो रही है। ग्रामीणों की चिता है कि अगर कोई अनहोनी हो जाए या फिर किसी की तबीयत ज्यादा खराब हो जाए तो वो क्या करेंगे? हालांकि मामले में जिलाधिकारी हिमांशु खुराना ने जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी को तत्काल कार्रवाई कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है।

दशोली विकासखंड के ईराणी गांव की आबादी एक हजार, पाणा ग्राम सभा के भनाली गांव की आबादी 200 और झींझी गांव की आबादी 100 के करीब है। इन गांवों की आवाजाही के लिए वीरगंगा नदी पर आज तक एक अदद पुल का निर्माण नहीं हो पाया है। हर वर्ष वीरगंगा नदी पर ग्रामीण लकड़ी के पुल का निर्माण करते हैं, लेकिन वीरगंगा के उफान पर आने के बाद पुल हर बार बह जाता है। बीते दिनों हुई बारिश के बाद 18 अक्टूबर को वीरगंगा का जलस्तर बढ़ने के बाद नदी के ऊपर बना कच्चा पुल बह गया। इससे गांवों की तकरीबन 1300 की आबादी घरों में ही कैद होकर रह गई। पुल बहने की सूचना राजस्व निरीक्षक गौंणा, जिला आपदा प्रबंधक विभाग को दी जा चुकी है। लेकिन, अभी तक ग्रामीणों की सुध नहीं ली गई है। ईराणी गांव के प्रधान मोहन सिंह नेगी का कहना है कि इस साल जुलाई माह में नदी का जलस्तर बढ़ने से कच्चा पुल बह गया था। इसके बाद ग्रामीणों ने नदी पर कच्चा पुल बनाया, लेकिन जुलाई के अंतिम सप्ताह में ही दूसरी बार यह पुल फिर बह गया। ग्रामीणों ने फिर से पुल का निर्माण सितंबर माह में किया, लेकिन 18 अक्टूबर को पुल फिर से बह गया। उन्होंने बताया कि मामले में स्थानीय प्रशासन व आपदा प्रबंधन महकमे को अवगत दिया गया है।

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