जागरण संवाददाता, बागेश्वर : अब उत्तराखंड में दुग्ध समितियां सिर्फ शहर से 25 किमी दायरे में होंगी। दुग्ध संघ को लाभ की स्थिति में 50 किमी तक समिति खोली जा सकेंगी। यह फरमान दुग्ध विभाग ने जारी किया है। अब शहर से सटे गांवों में ही दुग्ध समितियां बनेंगी वहां से दूध खरीदा जाएगा। इससे गांव के पशुपालकों को झटका लग सकता है। अलबत्ता यह निर्णय दूध के ढुलान में अधिक व्यय होने पर लिया गया है।

डेरी विकास विभाग के संयुक्त निदेशक जयदीप अरोड़ा ने सभी दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लि. को पत्र जारी किया है। उन्होंने पत्र में कहा कि जिला मुख्य दुग्धशाला की 25 किमी की परिधि के गांवों को डेरी विकास योजनाओं के लिए तैयार किया जाए। उन्होंने कहा कि दुग्ध उपार्जन व्यय कम करने के लिए ऐसा किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि दुग्ध डेरी को लाभ की स्थिति में लाने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है। उन्होंने पत्र में कहा है कि दुग्धशाला से 25 किमी की दूरी के अलावा दूसरे चरण में 50 किमी की परिधि में समितियां बनाई जाएंगी। उन्होंने आदेशों का पालन करने के निर्देश दिए हैं।

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गांव के दुग्ध का क्या होगा

दुग्ध संघ के निर्णय के बाद ग्रामीण क्षेत्रों के दुग्ध उत्पादकों की परेशानी बढ़ सकती है। मालूम हो वर्तमान में दुग्धशाला से करीब 100 किमी से अधिक दूरी तक समितियां बनाईं गईं हैं। जिले में करीब 81 समितियां हैं। ऐसे में यह समितियां बंद हो जाएंगी। दूध का उपार्जन करने वाले लोग बेरोजगार हो जाएंगे।

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पुरानी समितियों से दूध का उपार्जन हो रहा है। उन समितियों को बंद नहीं होने दिया जाएगा। नई समितियां बनाई जाएं। उससे दूध का उत्पादन बढ़ेगा।

-चंदन राम दास, विधायक, बागेश्वर

Posted By: Jagran

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