जागरण संवाददाता, बागेश्वर: जिले में टीबी रोग से संबंधित 385 मामले पंजीकृत किए गए है। टीबी कम होने के बजाय बढ़ते जा रही है जो चिता का विषय बनते जा रहा है। अब इसके समूल नाश को लेकर व्यापक रणनीति तैयार की जाने लगी है। जिला कार्यालय में टीबी फोरम की बैठक आयोजित हुई। बैठक में जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. एनएस टोलिया ने बताया कि वर्ष 2018 में कुल टीबी के 355 मामले पंजीकृत हुए थे। जबकि वर्तमान वर्ष में अब तक बागेश्वर जनपद में टीबी के 385 मामले पंजीकृत हो चुके हैं। बैठक की अध्यक्षता करते हुए प्रभारी जिलाधिकारी राहुल गोयल ने कहा कि टीबी के उन्मूलन के लिए किए जा रहे प्रयासों का व्यापक प्रचार एवं प्रसार किया जाए। समाज के अंतिम व्यक्ति तक यह जानकारी हो कि टीबी से प्रभावित व्यक्ति को सरकार द्वारा निश्शुल्क उपचार, जांच एवं पोषण आहार के लिए धनराशि आदि सुविधायें उपलब्ध करायी जा रही हैं। उन्होंने स्वास्थ विभाग को निर्देशित करते हुए कहा कि सोशल मीडिया, प्रिट एवं इलेक्टॉनिक मीडिया को माध्यम से टीबी के लक्षण, उसके रोकथाम एवं सरकार द्वारा निश्शुल्क रुप में किए जाने वाले उपचार आदि के बारे में अधिक से प्रसार करें। एएनएम के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाय कि प्रभावित व्यक्ति निर्धारित 6 माह अवधि का औषधीय कोर्स पूरा करें। उन्होंने कहा कि ऐसा देखने में आया हैं कि रोगी प्रारंभिक एक-दो माह तक टीबी के उपचार के लिए दवाई का सेवन करते है, कितु डॉट्स का कोर्स पूरा नहीं करते हैं जिस कारण टीबी की बिगड़ने की पूरी आशंका बनी रहती हैं। इस अवसर पर सीडीओ एसएसएस पांगती, एसीएमओ डॉ. वीके सक्सेना, महाप्रबंक उद्योग वीसी चौधरी, पूर्व सदस्य क्षेत्र पंचायत कमल टम्टा, घनश्याम, प्रवक्ता दीप जोशी, अमित तिवारी, महिपाल सिंह, अर्जुन कुमार सहित टीबी फोरम के सदस्य मौजूद थे।

Posted By: Jagran

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