जागरण संवाददाता, बागेश्वर: पिछले दिनों लगी आग से जिले के तीन हेक्टेयर वन जल गए। जबकि अक्टूबर माह में पहली बार जंगलों में आग लगने से सभी लोगों को अचंभा हो रहा है। अलबत्ता वनों को आग लगाने वालों के लिए सख्त नियम बनाने की भी मांग उठने लगी है।

मई-जून में जंगलों की आग हरवर्ष बेकाबू हो जाती है। पिरूल जलने के बाद बारिश होने पर हरी घास उग आती है और वह जाड़ों तक मवेशियों के काम आती है। जंगलों में हरियाली होने पर वन्यजीव भी वहां रहते हैं। लेकिन पहली बार अक्टूबर माह में वन जलने से लोग अचंभित हैं। वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार करीब तीन हेक्टेयर वन इस बीच जले हैं। वनों को आग लगने का कारण अराजक तत्व हैं। जिनका चिह्निकरण किया जा रहा है।

वन विभाग ने मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया है। लेकिन अभी भी जंगलों के बीच से धुंआ उठ रहा है। इधर, राज्य आंदोलनकारी हीरा बल्लभ भट्ट, हेम पंत, नंदाबल्लभ भट्ट आदि ने कहा कि वनों को बचाने के लिए सख्त कानून की जरूरत है। वन महकमे की भी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। उधर, प्रभागीय वनाधिकारी बीएस शाही ने कहा कि वनों में आग लगने से करीब तीन हेक्टेयर भूमि को नुकसान हुआ है। इसके अलावा अराजक तत्वों पर नजर रखी जा रही है।

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