जागरण संवाददाता, बागेश्वर: राजकीय ठेकेदारों के खिलाफ कर विभाग सख्त हो गया है। जीएसटी जमा नहीं करना उन्हें भारी पड़ गया है। ठेकेदारों को नोटिस भेज दिए गए हैं। अलबत्ता रिर्टन फाइल नहीं करने वालों पर 50 हजार का अर्थदंड लग सकता है। कर विभाग की कार्रवाई से ठेकेदारों में हड़कंप मच गया है।

जिले में करीब 500 ठेकेदार विभिन्न विभागों में पंजीकृत हैं। ए-क्लास में करीब सात, बी में 25 और डी में 50 सिर्फ लोनिवि में हैं और आरइएस, पीएमजीएवाइ, जलसंस्थान, जलनिगम आदि एजेंसियों में करीब पांच सौ ठेकेदार हैं। एक जुलाई 2017 से जीएसटी लागू हुई, लेकिन उस से पूर्व के निर्माण कार्यों में जीएसटी का कोई प्राविधान नहीं था, लेकिन ठेकेदारों का आरोप है कि जीएसटी लागू होने से पूर्व के बिलों से भी जीएसटी मांगी जा रही है। वहीं, कर विभाग ने जीएसटी जमा नहीं करने वाले ठेकेदारों को नोटिस भेज दिए हैं। जिससे हड़कंप मचा हुआ है और वह विभागों के चक्कर काट रहे हैं।

======

विभाग काटता है सिर्फ दो प्रतिशत

लोनिवि के ईई यूसी पंत ने बताया कि जीएसटी लागू होने से पूर्व विभाग ठेकेदारों का टैक्स काट कर जमा करता था, लेकिन जीएसटी लागू होने के बाद बीच में दो प्रतिशत काटा गया और दस प्रतिशत का भुगतान ठेकेदार को किया गया। ठेकेदार को यह धनराशि जीएसटी में जमा करनी थी, लेकिन वे नहीं कर पाए। ठेकेदारों का एक शिष्टमंडल विभाग से पूरी जीएसटी काटने को लेकर मिला है, उस पर मंथन किया जा रहा है। ठेकेदारों को नियमों के अनुसार जीएसटी आदि का भुगतान करना चाहिए।

========

मनमानी से परेशान ठेकेदार

ठेकेदार संघ के अध्यक्ष हीरा बल्लभ भट्ट, नोटिस तामिल ठेकेदार गणेश राम, राम किशन गौड़, गिरीश गौड़, संजय साह, रचित साह आदि ने कहा कि पूर्व के निर्माण कार्य में जीएसटी का प्राविधान नहीं था और ठेकेदारों को जीएसटी वापस भी नहीं मिला। यह मनमानी है, जिससे ठेकेदार परेशान हैं।

=======

समय पर रिर्टन फाइल नहीं होने पर 50 हजार रुपये तक का अर्थदंड भी वसूला जा सकता है। सभी देयओं का भुगतान समय पर करें और भविष्य में दंडात्मक कार्रवाई से बचा जा सकता है।

-कमल किशोर जोशी, अपर आयुक्त, कर।

Posted By: Jagran

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप