जागरण संवाददाता, बागेश्वर : ¨पडारी और कफनी ग्लेशियर के साहसिक पर्यटन में पिछले पांच सालों में करीब 80 प्रतिशत की गिरावट आ गई है। पर्यटन व्यवसाय से जुड़े युवा बेरोजगार हो गए हैं और रोजगार के लिए अन्य राज्यों को पलायन करने लगे हैं। द्ववाली के समीप झूला पुल का निर्माण नहीं होने से पर्यटकों की आवाजाही लगातार घट रही है। जिले के ¨पडारी और कफनी ग्लेशियर से करीब पांच हजार लोगों की रोजी-रोटी सीधे तौर पर जुड़ी हुई है। 2013 में आई आपदा के बाद ग्लेशियरों को जोड़ने वाला द्ववाली पुल का निर्माण अधर में लटका हुआ है। करीब एक करोड़ रुपये झूला पुल के लिए स्वीकृत हैं। जबकि ¨पडर नदी के दोनों किनारे पर अपरमेंट खड़े हो गए हैं। खाती, बाछम, दऊ, खर्किया, जांतोली, रि¨डग आदि गांवों के युवा बेरोजगार हो गए हैं। वे रोजगार के लिए छह मा गुजरात आदि स्थानों पर पलायन कर रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार पांच साल में करीब 80 प्रतिशत पर्यटकों की संख्या में कमी आई है। --------- चट्टान नहीं कटी द्ववाली के समीप करीब 600 मीटर चट्टान अभी नहीं कट सकी है। यहां से ग्लेशियरों का जाने वाला रास्ता था। पर्यटन ¨पडर के किनारे होते हुए जान हथेली में रखकर ग्लेशियरों की तरफ बढ़ रहे हैं। ------ कटर मशीनें खराब चट्टान काटने को दो कटर मशीनें यहां पहुंचाई गईं थी, वर्तमान में दोनों मशीनें खराब चल रही है। ------ पहले और अब पर्यटक 2013 से पूर्व तीन हजार पर्यटक हरसाल यहां पहुंचते थे, आपदा के बाद सिर्फ 500 पर्यटन ही पहुंच पा रहे हैं। ------ ये ग्रुप फेल हिमालयन यात्रा आर्गनाइजेशन के संचालक प्रकाश ¨सह दानू ने बताया कि इस साल पांच ग्रुप पुल बनने से नहीं आए। करीब चार लाख रुपये का नुकसान हुआ। नंदन ¨सह के भी चार ग्रुप नहीं आ सके। जबकि नवल, चामू ¨सह, खिलाफ ¨सह और खिलाफ राम भी पर्यटक नहीं आने से परेशान हैं। ........... द्ववाली में पुल निर्माण के लिए लोनिवि से बातचीत की जा रही है। झूला पुल का निर्माण जल्द कराया जाएगा। साहसिक पर्यटन को बढ़ने के हरसंभव प्रयास हो रहे हैं। -कीर्ती चंद्र आर्य, जिला पर्यटन अधिकारी, बागेश्वर

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