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जागरण संवाददाता, बागेश्वर: लाल गाड़ी और अपहरण मामले में पुलिस आखिरकार जीत गई और पीड़िता की मां ने लिखित पत्र देकर बच्ची के साथ कुछ भी नहीं होने की जानकारी दी। पुलिस के अनुसार घटना की नियमित जांच भी की जा रही है।

जिस बात की चर्चा थी आखिरकार वहीं हुआ और गरीब परिवार की पीड़िता के मामले में पुलिस ने आखिरकार मामले से पर्दा उठा ही दिया। मंगलवार को पचार, रीमा गांव की माया पांडे पत्नी स्व. भुवन चंद्र पांडे अपने परिजन और ग्राम प्रधान को साथ लेकर पुलिस चौकी रीमा पहुंची। एक प्रार्थना पत्र पुलिस को दिया और उनकी नाबालिग बेटी जिसकी उम्र 12 साल है। 15 जुलाई को शाम सात बजे दो लड़कों ने उसे पकड़कर गाड़ी की तरफ खींचने का प्रयास किया। जिस पर उनकी बेटी ने लड़के के हाथ में दांत काटा और पत्थर मारकर घर की और भागी। 16 जुलाई को पुलिस में मुकदमा दर्ज कराया था। उन्होंने पुलिस को बताया कि नाबालिग बेटी ने जो भी जानकारी दी। वह देर शाम घर आने के कारण डर गई और वह जानकारी गलत है। बेटी के साथ कोई भी घटना नहीं हुई है और एसओ जीवन सिंह चुफाल को लिखित प्रार्थना पत्र दिया और पंजीकृत मुकदमा वापस लिया।

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पुलिस ने अब तक क्या किया

पुलिस ने 16 जुलाई को मुकदमा पंजीकृत किया। पुलिस कर्मियों ने पचार, रीमा, कांडा आदि स्थानों पर वाहनों की चेकिग की। पचार पचार से रीमा, बागेश्वर, कांडा मार्ग तक पेट्रोलिग की। एसपी लोकेश्वर सिंह ने तकनीकी टीम गठित की और टीम को दिशा-निर्देश दिए। सीओ महेश चंद्र जोशी ने कोतवाल नरेश चौहान ने चार टीमें गठित की। लोगों से पूछताछ की और घटना की पुष्टि नहीं हुई। रीमा क्षेत्र व कांडा, बागेश्वर मार्ग के सभी सीसीटीवी फुटेज चैक करने पर घटना से संबंधित वाहन नहीं मिला। सर्विलांस टीम ने कालों की पुष्टि नहीं हुई और लाल रंग के वाहनों का चेकिग, सत्यापन किया गया और नहीं मिला। तीन लोगों से पूछताछ भी की गई और उन्होंने भी घटना की पुष्टि नहीं की।

Posted By: Jagran

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