संवाद सूत्र, कौसानी: पिनाकेश्वर महादेव मंदिर में भगवान को भागे लगने के बाद मेले शुरू हो गया है। 11 नवंबर को दिन और रात का मेला होगा। जागरण की रात कुमाऊं-गढ़वाल की संस्कृति का बेजोड़ संगम होगा। 12 नवंबर को मेले का रंगारंग समापन होगा।

पिनाकेश्वर महादेव मंदिर में काíतक पूíणमा का मेला शुरू हो गया है। कत्यूर और बोरारौ घाटी के गांवों से श्रद्धालुजन वहां पहुंचने लगे हैं। पिनाथ नामक पहाड़ी पर समुद्र तल से करीब आठ हजार फीट की ऊंचाई पर बसा है। यहां बोरारौ कत्यूर और गेवाड़ घाटी के करीब 200 गांवों के आराध्य देव भगवान शंकर की पूजा की जाती है। इस मंदिर की खोज राजा बाल बहादुर चंद्र ने 1438 ईसवी में आखेट के दौरान की थी। उन्होंने यहां पर आने-जाने के लिए 365 सीढि़यों का निर्माण कराया था। पिनाथ महादेव को उनके आराध्य देव के नाम से भी जाना जाता है। मंदिर में हर साल काíतक पूíणमा के दिन विशाल मेले का आयोजन किया जाता है। जिसमें बागेश्वर और अल्मोड़ा जिले के कई गांवों से लोग पहुंचते हैं। मंदिर के महंत नरेंद्र गिरी महाराज ने कहा कि रविवार को भोग के साथ मेला शुरू हो गया है। 11 नवंबर को मेले में पूरे दिन श्रद्धालु मंदिर में आकर भगवान के दर्शन करेंगे। इसके अलावा मेलार्थी मेले का भी आनंद लेंगे और रात को मंदिर में जागरण होगा। जिसमें श्रद्धालु भजन-कीर्तन कर भगवान की स्तुति करेंगे। 12 को सुबह शिव पूजा, हवन आदि के साथ मेले का समापन होगा। उन्होंने मेले के दौरान सभी श्रद्धालुओं से पर्यावरण का विशेष ध्यान रखने और मंदिर की सफाई व्यवस्था दुरुस्त रखने की अपील की है।

Posted By: Jagran

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