जागरण संवाददाता, बागेश्वर : पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कुली बेगार आंदोलन की अलख बागेश्वर से ही जगाई गई थी। यह वर्ष आंदोलन का शताब्दी वर्ष है। जिला बार एसोसिएशन सालभर कार्यक्रम चलाकर जिले को नई पहचान दिलाए। यहां से मिलने वाली ऊर्जा पूरे देश के अधिवक्ताओं को रोशनी देगी। उन्होंने कहा देश की आजादी में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की भूमिका अहम थी। उसे कतई नहीं भुलाया जा सकता है।

गुरुवार को जिला बार एसोसिएशन के तत्वावधान में आयोजित अधिवक्ता विश्राम गृह के शुभारंभ पर बतौर मुख्य अतिथि कही। उन्होंने कहा जिला बार ने इस तरह का भवन बनाकर अद्भुत प्रयास किया है। कहा पूरे देश में कहीं भी बार का अपना विश्राम गृह नहीं है। बागेश्वर की यह पहल अन्य जगह भी अंकुरित होगी। राज्य सभा सदस्य प्रदीप टम्टा ने कहा अधिवक्ताओं की मांग पर उन्होंने भी इस भवन को बनाने में अपनी सांसद निधि से दो लाख रुपये दिए थे।

अध्यक्षता करते हुए एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष गोविद सिंह भंडारी ने कहा पांच लाख की धनराशि से बार गेट, भवन, पुस्तकालय, मीटिग हॉल और विश्राम गृह बनाया गया है। इसका उपयोग अधिवक्ताओं के अलावा सीनियर सिटीजन, पत्रकार तथा तहसील के कर्मचारी कर सकते हैं। संचालन अधिवक्ता जीबी उपाध्याय ने किया। कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता महेंद्र सिंह कनवाल को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया। इस अवसर वृक्ष पुरुष किशन सिंह मलड़ा के नेतृत्व में विभिन्न प्रजाति के पौधे रोपे गये। यहां पूर्व विधायक उम्मेद सिंह माजिला, रंजीत बोरा, दलीप खेतवाल, इंद्र सिंह परिहार, धीरज कोरंगा, सज्जन लाल टम्टा, भगवती धपोला, मनोज जोशी, हरीश जोशी, चामू सिंह देवली, अशोक सिंह, राजेश रौतेला आदि मौजूद थे।

Posted By: Jagran

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