जागरण संवाददाता, बागेश्वर: आतंक का प्रर्याय बन चुका आमदखोर गुलदार को पकड़ने या फिर मार गिराने के लिए वन विभाग की टीम ने गांव में डेरा डाल दिया है। वहां मचान भी बना लिए गए हैं और आदमखोर पर लगातार नजर रखने के लिए एक टीम गांव पहुंच गईं हैं।

सलखन्यारी गांव में चार साल की च्योति को दो सितंबर की रात गुलदार घर के आंगन से उठा ले गया था। उसका शव जंगल में वन विभाग की टीम ने बरामद किया। गांव वालों ने तेंदुए को मारने की मांग की और वन विभाग की टीम ने शासन से अनुमति मांगी। टीम को शासन से पत्र मिला और सोमवार को वन विभाग की एक टीम गांव पहुंच गई है। टीम ने दिनभर पूरे जंगल की रैकी की। गुलदार के पंजों के निशान और उसके मल की जांच की गई। गुलदार ने जिस स्थान पर घटना को अंजाम दिया वहां पर मचान बना लिया गया है। तेंदुए को पहले ट्रैकूलाइजर करने की कोशिश की जाएगी। यदि टीम इसमें कामयाब नहीं रही तो उसे मार गिराया जाएगा। टीम गांव पहुंचने पर ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। जिला पंचायत सदस्य जितेंद्र मेहता ने कहा कि तेंदुए का आतंक गांव में बरकार है। लोग डरे और सहमे हुए हैं। उन्होंने कहा कि वन विभाग को जल्द से जल्द आदमखोर को मार गिराना होगा। :::::

लखपत ¨सह रुक कर आएंगे

शिकारी लखपत ¨सह अभी रुककर आएंगे। वह बुधवार तक यहां पहुंच सकते हैं। लखपत ¨सह चमोली जिले में बीएसए कार्यालय में तैनात हैं। चमोली के डीएम और बेसिक शिक्षाधिकारी ने उन्हें अवकाश दे दिया है। यदि गुलदार ट्रैकूलाइज नहीं हुआ तो उसे मार दिया जाएगा। :::::

अल्मोड़ा से आएगी दूसरी टीम

बागेश्वर में सिर्फ एक ट्रैकूलाइजर गन है। जबकि दूसरी गन अल्मोड़ा से मंगाई गई है। अल्मोड़ा की टीम अभी यहां नहीं पहुंच सकी है। अल्मोड़ा में कार्यक्रम होने से टीम देरी से यहां पहुंचने वाली है। इनसेट::::

एक लोकल टीम को गांव भेज दिया गया है। अल्मोड़ा में बैठक होने से दूसरी टीम अभी नहीं आई है। गुलदार को ट्रैकूलाइज कराना पहली प्राथमिकता है। शिकारी लखपत ¨सह को भी बुला लिया गया है।

-आरके ¨सह, डीएफओ, बागेश्वर।

Posted By: Jagran