घनश्याम जोशी, बागेश्वर

विदेश की धरती पर उत्तराखंडी सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया जा रहा है। सांस्कृतिक संध्या 19 अप्रैल से न्यूजीलैंड की धरती पर आयोजित की जाएगी। जिसमें बागेश्वर के बांसुरी वादक मोहन जोशी भी शामिल हो रहे हैं। बुधवार को वे न्यूजीलैंड के रवाना हो गए हैं। बागेश्वर के भगेड़ी गांव निवासी बांसुरी वादक मोहन जोशी ने दैनिक जागरण को बताया कि उत्तराखंड एसोसिएशन न्यूजीलैंड की ओर से 19 अप्रैल से न्यूजीलैंड के कुछ शहरों में उत्तराखंडी सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें देवभूमि उत्तराखंड के बहुत से प्रसिद्ध गायक, वादक विदेशी धरती पर पहाड़ी संस्कृति का जलवा बिखेरेंगे। यह दल 17 अप्रैल को न्यूजीलैंड रवाना हो गया है। वे भी न्यूजीलैंड में अपनी प्रस्तुतियां देंगे। ---------- दिल को छू जाती है बांसुरी की धुन बांसुरी हृदय को छू लेने वाला वाद्ययंत्र, हम सभी बांसुरी को बचपन से देखते सुनते आ रहे हैं और जब कहीं से इसकी मधुर स्वर लहरी सुनाई पड़ती है, तो यकीनन आपका भी मन अनायास ही इसकी ओर खिचा चला जाता होगा। ---------- विदेश में चौथी बार बजेगी बांसुरी मोहन जोशी ने बताया कि उनकी बांसुरी की धुन तीन बार दुबई और अब चौथी बार न्यूजीलैंड में बजने जा रही है। इसके अलावा भारत के कई शहरों में वे अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर चुके हैं। ---------- मस्कबीन में महारथ विशेष बात यह है कि मोहन को बांसुरी के अलावा उत्तराखंड के लोक वाद्य मस्कबीन को बजाने में भी महारत हासिल है। साथ ही हुड़का जैसे प्रभावी वाद्ययंत्र को भी बखूबी बजा लेते हैं। .......... विदेशों में रह रहे प्रवासी उत्तराखंड के लोगों के लिए यह बड़ा सुकूनदायक होता है कि उनके पहाड़ के वाद्य यंत्र की धुन वहां सुन पाते हैं। उनके चेहरे पर उल्लास देख कर लगता है कि वतन से दूर रह कर भी उनमें अपनी संस्कृति के प्रति जुड़ाव है, और ़खुद का इतनी दूर जाकर प्रस्तुतियां देना सफल और सार्थक महसूस होने लगता है। -मोहन जोशी, बांसुरी वादक, बागेश्वर

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