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बागेश्वर में हाईवे पर पत्थरों की बरसात, सुबह से मलबा हटाने में जुटा बीआरओ... दोनों तरफ वाहनों की कतार

Published: Thu, 10 Sep 2026 09:00 AM (IST)

गरुड़-बागेश्वर राष्ट्रीय राजमार्ग पर रवाईखाल के पास पहाड़ी से पत्थर गिरने के कारण यातायात बाधित हो रहा है।

HighLights

  1. रवाईखाल पर पहाड़ी से पत्थर गिरने से गरुड़-बागेश्वर मार्ग बाधित

  2. दिन में मलबा हटाने के कारण राजमार्ग पर लंबा जाम

  3. स्थानीय लोगों ने जिलाधिकारी से समय सारिणी तय करने की मांग

जागरण संवाददाता, बागेश्वर । राष्ट्रीय राजमार्ग गरुड़-बागेश्वर पर रवाईखाल के समीप पहाड़ी से लगातार पत्थर गिरने के कारण यातायात व्यवस्था पटरी से उतर रही है। मार्ग पर गिरे मलबे को हटाने के लिए बीआरओ सुबह से ही जुट रहा है, लेकिन दिन के समय चल रहे मलबा हटाने के कार्य के कारण दोनों ओर लंबा जाम लग रहा है। इससे स्थानीय लोगों में आक्रोश बढ़ रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि पहाड़ी से पत्थर गिरने की समस्या लगातार बनी हुई है तो मलबा हटाने के लिए समय सारिणी तय की जानी चाहिए। सुबह के समय मार्ग पर यातायात का दबाव अधिक रहता है। स्कूल जाने वाले वाहन, शिक्षक-कर्मचारी, चिकित्सक, फार्मासिस्ट समेत बड़ी संख्या में लोग इसी समय मार्ग से गुजरते हैं।

मलबा हटाने के दौरान मार्ग बाधित होने से उन्हें घंटों जाम में फंसना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि सुबह दस बजे के बाद मलबा हटाने का कार्य शुरू किया जा सकता है और एक-दो घंटे के अंतराल में मार्ग को यातायात के लिए खोला जाना चाहिए। इसी तरह शाम छह बजे के बाद फिर से मलबा हटाने का कार्य किया जाए, ताकि दिन के व्यस्त समय में यातायात बाधित न हो।

आरोप है कि निर्धारित समय सारिणी नहीं होने के कारण आए दिन लोगों को जाम की समस्या से जूझना पड़ रहा है। जाम में दूध के वाहन, फल-सब्जी और अन्य जरूरी सामग्री लेकर आने वाले वाहन भी फंस रहे हैं। इससे स्थानीय बाजार और ग्रामीण क्षेत्रों में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति भी प्रभावित हो रही है। लोगों ने जिलाधिकारी से मामले का तत्काल संज्ञान लेकर बीआरओ को मलबा हटाने के लिए व्यावहारिक समय सारिणी निर्धारित करने के निर्देश देने की मांग की है।

स्थानीय निवासी विपिन जोशी, खीम सिंह ऐठानी, भास्कर तिवारी और मनोज कुमार आदि ने कहा कि यदि समय रहते व्यवस्था नहीं सुधारी गई और मलबा हटाने के कार्य का समय निर्धारित नहीं किया गया तो स्थानीय लोगों को आंदोलन के लिए मजबूर होना पड़ेगा।