संवाद सहयोगी,रानीखेत : केंद्र सरकार के लॉकडाउन के आदेश का पहाड़ों व्यापक असर है। एक ओर लोग बीमारी से बचने के लिए घरों में आए आइसोलेट है, वहीं दूसरे प्रदेशों से मजदूरी को आए श्रमिकों के सम्मुख एकाएक पहाड़ जैसा संकट आ खड़ा हुआ है। काम मिलना बंद होने पर श्रमिकों को दो जून की रोटी के लाले पड़ गए हैं। ऐसे में उनको घर लौटने के अलावा और कोई विकल्प नजर नहीं आ रहा। भूख-प्यास सहन करते हुए श्रमिकों ने पैदल ही अपने गंतव्य के लिए दूरी नापनी शुरू कर दी है।

अल्मोड़ा-हल्द्वानी हाईवे से सटे ढोलगाव में सड़क निर्माण के लिए फतेहगंज पश्चिमी (बरेली) से 18 श्रमिक पहुंचे। कोरोना वायरस से बचाव को 31 मार्च तक बंदी होने के बाद श्रमिकों ने यहीं रहने का मन बनाया। अब अप्रैल तक लॉकडाउन होने पर श्रमिकों को मजबूरी में पैदल ही घर के लिए रवाना होना पड़ रहा है। ठेकेदार से संपर्क साधा तो उसने बागेश्वर होने का हवाला दे आवाजाही बाधित होने की बात कहीं। ऐसे में श्रमिकों का दल पैदल ही करीब 280 किलोमीटर की दूरी नापने निकल पड़ा है। श्रमिकों में शामिल भगवान दास, संजीव,पुष्पेंद्र, विजय आदि के अनुसार थोड़ा-बहुत आटा उनके पास पड़ा हुआ है। जहा जगह मिलेगी, रोटी बना ली जाएगी। जमा पूंजी भी खत्म होने को है।

Posted By: Jagran

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