जागरण टीम अल्मोड़ा/भिकियासैंण: गर्मी की दस्तक के साथ ही जिला मुख्यालय समेत विभिन्न विकासखंडों में पेयजल किल्लत शुरू हो गई है। 16 एमएलडी के सापेक्ष आठ एमएलडी (मिलियन लीटर पर डे) पानी ही मिल पा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर हैंडपंप तो हैं मगर अधिकांश के हलक सूख चुके हैं। ऐसे में खासतौर पर महिलाएं और बच्चे सुबह तड़के उठकर दूरदराज से पानी ढोने में जुट जाते हैं।

जिला मुख्यालय समेत ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल किल्लत लगातार बढ़ती जा रही है। शासन व पेयजल विभाग की ओर से इन क्षेत्रों में पुख्ता व ठोस योजना नहीं बनाए जाने से लोग बूंद-बूंद को तरसने लगे हैैं। विकासखंड हवालबाग, भैसियाछाना, ताकुला, लमगड़ा के अधिकांश स्त्रोतों में पानी की कमी से लोगों की जरूरतें पूरी नहीं हो पा रही है। वहीं नगर पंचायत भिकियासैंण के लोग पिछले दो सप्ताह से पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। नलों में इन दिनों पानी की आपूíत बहुत कम हो रही है। इस लोगों का अधिकांश समय पेयजल की व्यवस्था करने में ही जाया हो रहा है। उपभोक्ताओं का कहना है कि भिकियासैंण के पास से ही गगास व रामगंगा नदियां बहती हैं। इसके बाद भी जल संस्थान उपभोक्ताओं के लिए पुख्ता इंतजाम नहीं कर पाया है। उपभोक्ताओं का कहना है कि भिकियासैण में करोड़ों रुपये खर्च कर एकल पंपिग योजना बनाई गई हैं फिर भी यहां के लोग पानी के लिए तरस रहे हैं।

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20 हैंडपंप पड़े हैं खराब

जिले में 1298 हैंडपंप लगे है। इसमें 20 अरसे से खराब पड़े हैं। वहीं करीब 70 जलस्तर कम होने से वह ठप पड़े हैं। इन हैंडपंपों को दुरुस्त किए जाने की मांग संबंधित क्षेत्रों के जनप्रतिनिधि लंबे अरसे से उठा रहे हैं। इसके बाद भी कोई सुधलेवा नहीं है।

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गर्मी बढ़ने का असर जलस्त्रोतों पर पड़ रहा है। जिले में खराब पड़े हैंडपंपों को दुरुस्त करने के लिए कार्ययोजना तैयार कर ली गई है।

- केएस खाती, अधिशासी अभियंता, जल संस्थान

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