संवाद सहयोगी, रानीखेत : धार्मिक समरसता का ऐसा नजारा कम ही देखने को मिलता है। विवेकानंद विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में इस मुस्लिम समाजसेवी ने सर्व धर्म समभाव की जो मिसाल पेश की, वह धार्मिक सद्भाव का संदेश दे गई। मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप जलाया, ज्ञान की देवी को झुक कर प्रणाम किया। आसन लगा कर बैठे ही नहीं बल्कि बच्चों को महाग्रंथ 'गीता' के उपदेशों पर अमल कर गुरु शिष्य परंपरा को जीवंत रखने का आह्वान भी किया।

मौका था नगर के विवेकानंद विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में 'वंदना सभा' का। बाल एवं किशोर मन में अध्यात्म की लौ जगाने व वैदिककालीन संस्कृति से जोड़ने के उद्देश्य से आयोजित कार्यक्रम का श्रीगणेश किया समाजसेवी रोजीअली खान ने। उन्होंने 'गीता' को जीवन का सार बताया। कहा कि इसमें पूरा आत्मज्ञान मिलता है। रोजी अली खान ने नौनिहालों को आधुनिक भारत का निर्माता बताते हुए कहा कि माता पिता व गुरु का सम्मान कर ही विकसित राष्ट्र के निर्माण में वह सहायक बन सकते हैं।

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दैनिक जीवन में आत्मसात करें मंत्रों को : आचार्य रमेश

'वंदना सभा' में गुरुजन व आचार्यगणों ने बच्चों को गायत्री एवं भोजन मंत्र के सही उच्चारण का ज्ञान कराया। अभ्यास कराया। वहीं भागवत गीता के श्लोकों, उनके भावार्थ को बारीकी से समझाया। वहीं मां भारती की वंदना आदि का महत्व बताते हुए वैदिक संस्कृति से जुड़ी वंदना एवं मंत्रोच्चार की विद्या को आत्मसात करने के लिए प्रेरित भी किया। प्रधानाचार्य आचार्य रमेश बिष्ट ने समाजसेवी रोजी अली खान की सराहना करते हुए कहा कि धार्मिक सद्भाव व समरसता के जरिये ही भारत अखंड बन सकता है। इस अवसर पर आचार्य अमर सिंह, राजेन राणा, पवन कुमार, खीमा नंद, भगवती पांडे, मीनाक्षी व गंगा कोरंगा के साथ ही विद्यार्थी उपस्थित रहे।

Posted By: Jagran