संवाद सहयोगी, द्वाराहाट : पौराणिक द्वारका स्थित पांडवखोली (ब्रह्म पर्वत) में उत्तराखंड की गौरवशाली परंपरा व लोक संस्कृति जीवंत हो उठी। पांडु पुत्रों की विशेष पूजा अर्चना के बाद ब्रह्मलीन महंत बलवंत गिरि जी महाराज का भावपूर्ण स्मरण किया गया। स्थानीय स्कूली बच्चों व कलाकारों ने देवभूमि की अनूठी सांस्कृतिक विरासत का दीदार कराया। वार्षिक मेले में दूरदराज के ग्रामीणों का तांता लगा रहा।

द्रोणागिरि पर्वतश्रृंखला में द्वापरयुगीन सभ्यता एवं संस्कृति के गवाह पांडवखोली में रविवार को महंत बलवंत गिरि महाराज की स्मृति में मेला लगा। 26वीं पुण्यतिथि पर महात्मा का भावपूर्ण स्मरण किया गया। इससे पूर्व पांडवों के प्रतीक पाषण वीरखंभों का विशेष पूजन किया गया। विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों के बाद बुग्यालनुमा (भीम की गुदड़ी) मैदान में बच्चों, महिलाओं व पुरुषों की दौड़ प्रतियोगिता हुई।

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ग्रामीणों के लिए लगा स्वास्थ्य शिविर

मेले के दौरान दूरदराज गांवों से पहुंचे लोगों के लिए स्वास्थ्य शिविर भी लगा। इसमें दंत रोग विशेषज्ञ डा. रिचा नेगी व डॉ. ललित नेगी ने रोगियों की जांच कर उपचार की सलाह दी। वहीं नागरिक चिकित्सालय के चिकित्सकों ने भी मरीजों की जांच कर दवाईयां बांटी।

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ये जुटे रहे कारसेवा में

दोपहर बाद पांडवखोली में भंडारा लगा। इसमें पर्यटक नगरी रानीखेत के साथ ही कौरवछीना (कुकुछीना), दुधोली, भरतकोट, खोलियाबाज, द्वाराहाट, बग्वालीपोखर आदि क्षेत्रों से पहुंचे ग्रामीणों ने प्रसाद ग्रहण किया। पथ भ्रमण संघ अध्यक्ष हरीश लाल साह, यतीश सिंह रौतेला, चंदन नेगी, पुष्कर पांडे, दिगंबर नेगी आदि कारसेवा में जुटे रहे।

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