संवाद सहयोगी, अल्मोड़ा : उत्तराखंड क्रांति दल ने कहा है कि गैरसैंण (चंद्रनगर) को उत्तराखंड की स्थायी राजधानी बनाए बगैर राज्य अधूरा है। साथ ही कहा है कि जनभावनाओं के अनुरूप राज्य की स्थायी राजधानी गैरसैंण बनाने के लिए कारगर उपाय किए जाने की आवश्यकता है।

दल के केंद्रीय उपाध्यक्ष एड. महेश परिहार ने कहा है कि राज्य गठन के 17 सालों बाद भी राज्य की स्थायी राजधानी की घोषणा नहीं किया जाना चिंता का विषय है। जबकि उत्तराखंड के साथ-साथ ही बने छत्तीसगढ़ व झारखंड राज्यों को स्थायी राजधानी मिल चुकी है। कहा कि राज्य का विकास सिर्फ व सिर्फ गैरसैंण को ही स्थायी राजधानी बनाकर किया जा सकता है। परिहार ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 के लोक सभा चुनावों में उत्तराखंड के विभिन्न स्थानों पर चुनावी सभाओं को संबोधित कर कहा था कि पृथक उत्तराखंड राज्य पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी की देन है, इसलिए भाजपा ही राज्य का समग्र विकास करने में सक्षम है। कहा कि अब समय आ गया है कि वह राज्य के जनभावनाओं तथा अपनी कथनी के अनुसार राज्य की स्थायी राजधानी गैरसैंण जल्द घोषित करे। उन्होंने कहा है कि पृथक उत्तराखंड राज्य गठन को 17 साल पूरे हो चुके हैं, इसके बाद भी नगरों व ग्रामीण क्षेत्रों का अपेक्षित विकास नहीं हो पाया है। उन्होंने कहा है कि उत्तराखंड क्रांति दल जनसमस्याओं के प्रति लगातार सजग है, इसके लिए दल का संघर्ष अभियान जारी रहेगा।

Posted By: Jagran