संवाद सहयोगी, रानीखेत : कुमाऊं रेजिमेंट सेंटर ऐतिहासिक सोमनाथ मैदान स्थित युद्ध स्मारक पर 'बड़गाम' दिवस पर परमवीर चक्र विजेता स्व. मेजर सोमनाथ शर्मा को श्रद्धाजलि दी गई। इस दौरान पाकिस्तानी फौज की मदद से कबालियों के काश्मीर हमले को नाकाम करने की विस्तार से जानकारी दी।

बताते चलें कि भारतीय सेना तीन नवंबर को प्रतिवर्ष बड़गाम दिवस के रूप में मनाती है। इसी दिन वर्ष 1947 को मेजर सोमनाथ शर्मा पाकिस्तानी समर्थित आक्रमणकारियों से लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए।

सेना के अधिकारियों व जवानों ने युद्ध स्मारक पर मेजर सोमनाथ शर्मा को श्रद्धाजलि दी। इस दौरान मेजर सोमनाथ की वीरता व साहस का बखान करते हुए अक्टूबर 1947 में पाकिस्तानी फौज के समर्थन से कबाइलियों के कश्मीर हमले को नाकाम करने की गाथा सुनाई। साथ ही मेजर के शहीद होने से कुछ पल पहले बिग्रेड मुख्यालय को भेजा गया संदेश कि 'दुश्मन हमसे 50 गज की दूरी पर है दुश्मन हमसे कई गुना संख्या में हैं, लेकिन मैं एक इंच भी पीछे नहीं हटूंगा और अंतिम जवान व अंतिम राउंड तक लड़ता रहूंगा'। उनकी बहादुरी का सर्वोच्च बलिदान के लिए इन्हें मरोणोपरांत स्वतंत्र भारत के पहले सर्वोच्च वीरता पुरस्कार परमवीर चक्र से सम्मानित भी किया गया। इस दौरान सेना के अधिकारी व जवान मौजूद रहे।

Posted By: Jagran

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