रानीखेत अस्पताल में लापरवाही का स्ट्रेचर: उपचार के अभाव में घायल बुजुर्ग ने तोड़ा दम
रानीखेत नागरिक चिकित्सालय के गेट पर एक घायल बुजुर्ग की स्ट्रेचर और समय पर उपचार न मिलने के कारण मौत ...और पढ़ें
HighLights
रानीखेत अस्पताल गेट पर घायल बुजुर्ग की मौत।
स्ट्रेचर व समय पर उपचार न मिलने का आरोप।
ग्रामीणों ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठाए सवाल।
जागरण संवाददाता, रानीखेत। उपमंडल के सबसे बड़े गोविंद सिंह माहरा नागरिक चिकित्सालय के गेट पर घायल बुजुर्ग की मौत ने व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया। सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल ग्रामीण को नाजुक हालत में चिकित्सालय पहुंचाया गया। ग्रामीणों के अनुसार इमर्जेंसी में तैनात चिकित्साधिकारी से गुहार लगाने पर उन्होंने घायल को आपातकालीन वार्ड में लाने की सला दी।
मगर न तो स्ट्रेचर मिला, ना ही कोई स्वास्थ्य कर्मी मिला। तब तक बुजुर्ग की सांस चल रही थी लेकिन स्ट्रेचर के लिए आधा घंटे की आपाधापी और समय पर गहन प्राथमिक उपचार न मिलने से घायल ने दम तोड़ दिया। गुस्साए ग्रामीणों ने पहाड़ की बदहाल स्वास्थ्य सेवा पर गुबार निकाल संवेदनहीनता पर हंगामा काटा।
उधर, आपातकालीन कक्ष में तैनात चिकित्साधिकारी डॉ. सौरभ ने कहा कि ग्रामीणों ने यह नहीं बताया कि बुजुर्ग की स्थिति गंभीर है। इसीलिए घायल को इमर्जेंसी वार्ड में लाने को कहा गया। बहरहाल, बेहतर उपचार की आस में जिस चिकित्सालय में बुजुर्ग को लाया गया, उसके दरवाजे पर लापरवाही ने घायल की जान ले ली।
मजखाली निवासी 65 वर्षीय पूरन सिंह अधिकारी सोमवार को गांव में ही नामकरण समारोह में हिस्सा लेकर घर लौट रहे थे। तभी हाईवे पर एक तेज रफ्तार बाइक ने उन्हें चपेट में ले लिया। टक्कर इतनी जबर्दस्त थी कि पूरन सिंह सड़क पर बेसुध होकर गिर पड़े।
समाजसेवी नरेंद्र सिंह अधिकारी व अन्य ग्रामीण घायल को बेहोशी की हालत में नागरिक चिकित्सालय लेकर पहुंचे। उस वक्त तक बुजुर्ग की सांसें चल रही थीं।
ग्रामीणों का आरोप है कि आपातकालीन वार्ड में तैनात चिकित्सक से लगातार बाहर आकर मरीज को देखने की गुहार लगाई गई। मगर चिकित्सक बाहर नहीं आए। घायल को इमर्जेंसी वार्ड तक ले जाने के लिए स्ट्रेचर तक नसीब नहीं हुआ।
लाचार ग्रामीण मदद की गुहार लगाते रहे, लेकिन एक भी स्वास्थ्य कर्मी या वार्ड ब्वाय मरीज को संभालने बाहर नहीं आया। अपनों के सामने बुजुर्ग स्ट्रेचर व उपचार के इंतजार में चिकित्सालय गेट के बाहर मौत से हार गया।
हड्डी रोग विशेषज्ञ मदद को दौड़े, पर बेकार गई मेहनत
स्ट्रेचर के लिए जूझ रहे ग्रामीणों के गुस्सा होने पर हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. देवेंद्र सिंह नेगी मदद के लिए दौड़े। किसी तरह स्ट्रेचर की व्यवस्था की ताकि घायल को उपचार दिलाया जा सके। मगर तब तक देर हो चुकी थी।
