संवाद सहयोगी, रानीखेत : ड्राइक्लीनर अतिकुर्रहमान तो प्यादा है। पर्यटन नगरी और छावनी क्षेत्र की आड़ में यहां कबाड़ के बहाने ऑटो लिफ्टर गैंग की जड़ें कुछ वर्षो से काफी मजबूत हो चली हैं। इसमें नगर के कुछ और लोग भी लिप्त हैं। सूत्रों की मानें तो अकेले बाजार क्षेत्र में की एकाध नहीं चोरी की कई गाडि़यां बिक चुकी हैं। अंतरराज्यी चोर गिरोह के बड़े खुलासे के बाद बाहरी राज्यों के नंबरों के वाहन खरीद चुके लोग सकते में हैं। बहरहाल, एसओजी की इस बड़ी कार्रवाई से कोतवाली पुलिस व उसके कारिंदों की कार्यप्रणाली तथा भूमिका पर भी बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।

वर्ष 2015 में रुद्रपुर (ऊधम सिंह नगर) में चोरी की करीब 30 वाहनों की बरामदगी का मामला हो या ट्रांजिट कैंप थाने में 15 चौपहिया गाडि़या पकड़े जाने का मामला। पर्वतीय राज्यों में रानीखेत में अंतरराज्यीय चोर गिरोह के खुलासे का यह अब तक का सबसे बड़ा प्रकरण सामने आया है। सूत्रों के मुताबिक पर्यटन नगरी में यह खेल बीते दो वर्षो से फलफूल रहा था। लंबी जद्दोजहद, सबूत जुटाने व मुखबिर तंत्र की सटीक जानकारी के बाद गिरोह के सरगना तक एसओजी को पहुंचने में कामयाबी मिली है। सूत्र यह भी दावा करते हैं कि अतिकुर्रहमान को नगर में शह देने वाले और तमाम लोग हैं जो अंतरराज्यीय गिरोह की जड़ें रानीखेत में मजबूत कर चुके। एसएसपी पी रेणुका देवी ने भी माना कि जांच के बाद इसका खुलासा होने की उम्मीद है।

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खतरनाक है रानीखेत का हल्द्वानी व रामपुर कनेक्शन

सूत्र यह भी दावा करते हैं कि रानीखेत में चल रहे इस अंतरराज्यीय गिरोह का हल्द्वानी व रामपुर (उप्र) के ऑटो लिफ्टरों से सीधा कनेक्शन भविष्य के लिए खतरनाक संकेत हैं। वाहनों की खरीद फरोख्त बेशक गुपचुप होती हो मगर कबाड़ के कारोबार के बहाने यहां बाहरी लोगों की घुसपैठ ने पुलिस के सत्यापन अभियान की हकीकत भी सामने ला दी है। सूत्र बताते हैं कि यहां फर्जी आइडी व राशन कार्ड रहने वालों की संख्या भी लगातार बढ़ रही।

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दिल्ली पुलिस को किया अलर्ट

एसएसपी पी रेणुका देवी ने कहा, चोरी किए गए वाहनों के मामले में दिल्ली के विभिन्न थानों में पहले ही मुकदमा दर्ज है। वहां की पुलिस को अलर्ट कर बता दिया गया है कि अंतरराज्यी चोर गिरोह के सरगना रानीखेत में है और उसका बहनोई दिल्ली से उड़ाए गए वाहन रामपुर में अतिकुर्रहमान को सौंपता है। माना जा रहा कि मास्टर माइंड अमजद खान भी जल्द सलाखों में होगा।

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'इतने बड़े मामले में एक ही सरगना है, कह नहीं सकते। गिरोह के तार कहां कहां जुड़े हैं, इसमें और कौन कितने लोग शामिल हैं, यह सब जांच कर रहे हैं। लोगों से इतना ही कहेंगे कि सस्ते वाहनों के फेर में कहीं ऐसा न हो कि चोरी के वाहन खरीदे जा रहे। कागजात वगैरह चेक करने के बाद ही सेकंड हैंड वाहन खरीदें। रानीखेत में और कौन कौन गिरोह में शामिल हैं, चोरी की गाडि़यां किस किसने खरीदी है, जल्द खुलासा करेंगे।

- पी रेणुका देवी, एसएसपी'

Posted By: Jagran