आजाद भारत की पहली आयुर्वेदिक ड्रग फैक्टरी बदहाल, जीबी पंत ने की थी स्थापना... चार साल से बंद
रानीखेत की ऐतिहासिक सहकारी ड्रग फैक्टरी, जो कभी देश की पहली आयुर्वेदिक दवा इकाई थी, बदहाली का शिकार है और चार साल से बंद पड़ी है।

आजाद भारत की पहली आयुर्वेदिक दवा फैक्टरी अपने ही राज्य में बेगानी. Jagran

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दीप सिंह बोरा, रानीखेत। ब्रिटिश कालीन भव्य भवन और आजाद भारत में सहकारिता के इतिहास का स्वर्णिम अध्याय समेटे रानीखेत ‘कोआपरेटिव ड्रग फैक्टरी’ अपनी ही माटी में बेगानी हो चली है। कभी देश दुनिया में अपनी आयुर्वेदिक उत्पादों और शानदार टर्नओवर के लिए प्रसिद्ध सहकारिता आधारित पहली दवा फैक्टरी बदहाल है।
तीन माह पूर्व सहकारिता मंत्री डा. धन सिंह रावत ने इसे राज्य सहकारी संघ (यूसीएफ) के जरिये पुनर्जीवित किए जाने की घोषणा की थी। मगर इस दिशा में खास प्रगति नहीं हो सकी है। अलबत्ता, राज्य सहकारी संघ के प्रबंध निदेशक आनंद शुक्ला दावा करते हैं कि नवंबर में रानीखेत कोआपरेटिव ड्रग फैक्टरी में उत्पादन शुरू कर दिया जाएगा।
1954 में भारत रत्न पं. गोविंद बल्लभ पंत की पहल पर करीब सवा चार एकड़ में स्थापित की गई थी रानीखेत ड्रग फैक्टरी। उत्तराखंड गठन तक सालाना तीन से चार करोड़ का टर्न ओवर देने वाली इस फैक्टरी में महाशंख वटी, आरोग्यवर्धिनी वटी, त्रिफला चूर्ण, अश्वगंधा चूर्ण, अर्जुनारिष्ट, दशमूलारिष्ट, महानारायण तेल, अभ्रक भस्म समेत 300 आयुर्वेदिक उत्पाद तैयार किए जाते थे।
कायम है उम्मीद
राज्य गठन के डेढ़ दशक बाद ड्रग फैक्टरी का बुरा दौर शुरू हुआ। 2017 में तत्कालीन सरकार ने यहां आयुर्वेदिक विवि की शाखा खोलने का ऐलान किया, जो हवाई साबित हुई। फिर फैक्टरी का निजीकरण किया गया लेकिन नहीं चल सकी। पिछले चार वर्षों से काम ठप है। बीते जून में यूसीएफ के माध्यम से इसे पुराने स्वरूप देकर उत्पादन शुरू करने की घोषणा से नई उम्मीद जरूर जगी हैं।
यूसीएफ की कसरत तेज
सूत्रों के अनुसार छह वर्ष पूर्व बाबा रामदेव को रानीखेत ड्रग फैक्टरी चलाने की पेशकश की गई थी। मगर उन्होंने भी निवेश में दिलचस्पी नहीं दिखाई। अब सरकार की मंशा के अनुरूप यूसीएफ ने इसे संवारने और पुनर्जीवित करने के लिए कसरत तेज तो कर दी है, मगर इसमें वक्त लग सकता है।
‘नवंबर में वटी (टेबलेट), चूर्ण व च्यवनप्राश का उत्पादन शुरू कर देंगे। भवन रिनुएट कर पुरानी मशीनें रिपेयर कर दी हैं। 50 प्रतिशत नई मशीनें लगा रहे हैं। कुछ औपचारिकताएं शेष हैं। पुराने कुशल अनुभवी कामगार दोबारा काम पर रखे जाएंगे। पहले जो गल्तियां हुई हैं, उन्हें सुधारकर बेहतर ढंग से फैक्टरी चलाएंगे।
- आनंद शुक्ला, एमडी यूसीएफ’‘यूपी के दौर में यहां 40 अधिकारी कर्मचारी, 300 स्थायी व साढ़े तीन सौ अस्थायी कामगार कार्यरत थे। स्थानीय लोग रोजगार से जुड़े थे। चार वर्षों से रानीखेत ड्रग फैक्टरी दुर्दशा झेल रही है। अभी यहां एक प्रभारी, आयुर्वेदाचार्य, सहायक कैमिस्ट व तीन हेल्पर हैं। सरकार व यूसीएफ इसे पुनर्जीवित कर नवंबर दिसंबर तक उत्पादन शुरू करती है तो यह बड़ी उपलब्धि होगी।
- मोहन नेगी, अध्यक्ष रानीखेत ड्रग फैक्टरी कर्मचारी संघ’
