संवाद सहयोगी, अल्मोड़ा : कोरोना से जंग में पीआरडी जवान भी अहम भूमिका अदा कर रहे हैं। दो महीने से मानदेय नहीं मिलने के कारण परिवार के सामने दो वक्त की रोटी का संकट उत्पन्न हो गया हैं। इसके बावजूद संकट की इस घड़ी में ये जवान समाज और राष्ट्रहित में शिद्दत से ड्यूटी पर तैनात हैं।

अल्मोड़ा जिले की बात करें तो यहां करीब साढ़े चार सौ से अधिक प्रांतीय रक्षक दल के जवान हैं। जिनमें से करीब 50 महिला काíमक हैं। ढाई सौ की कोरोना ड्यूटीं जबकि अन्य को तहसील थानों और सरकारी संस्थाओं में तैनात किया गया है। इन पीआरडी जवानों को पिछले दो महीनों मार्च और अप्रैल का मानदेय नहीं दे सका है। अब मई महीना भी खत्म होने को है। ऐसे में इन जवानों के सामने अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करना मुश्किल होता जा रहा है।

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अक्टूबर का भी आधा मानदेय रोका

अल्मोड़ा : मार्च और अप्रैल का वेतन ही नहीं बल्कि पिछले साल अक्टूबर में चुनाव ड्यूटी के अलावा बाकी 16 दिनों का मानदेय भी इन जवानों को नहीं मिला है। इसके अलावा कमांडर व हवलदार रैंक पर मिलने वाले पांच सौ और तीन सौ रुपये का अतिरिक्त भुगतान भी दो सालों से नहीं मिल पाया है।

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मानदेय के बारे में कई बार उच्च अधिकारियों को लिखा गया है लेकिन इसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हो पा रही है। फिर भी पीआरडी के सभी जवान कोरोना संक्रमण काल में समर्पित भाव से अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

-चिताराम आगरी, जिलाध्यक्ष, पीआरडी संगठन

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मैंने दो-ढाई महीने पहले ही चार्ज लिया है। कोविड में लगे पीआरडी जवानों के मानदेय में थोड़ी दिक्कत आ रही है। जल्द ही वेतन देने की व्यवस्था की जा रही है।

-केके पंत, प्रभारी अधिकारी प्रांतीय रक्षक दल, अल्मोड़ा

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Posted By: Jagran

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