संवाद सहयोगी, अल्मोड़ा : जंगलों के लिए अभिशाप बन रहे पिरूल से रोजगार के अवसर पैदा करने की मुहिम अब रंग लाती दिख रही है। अब ग्रामीण क्षेत्रों के लोग पिरूल से बिजली का उत्पादन कर उसे बिजली विभाग को बेच सकेंगे। बिजली विभाग ने बिजली उत्पादन करने वाले लोगों के संयंत्रों से नजदीकी विद्युत उप संस्थान तक बिजली की आपूíत के लिए लाइनें बिछाने की कवायद शुरू कर दी है।

पर्वतीय क्षेत्रों में चीड़ की पत्तियों (पिरूल) से जंगलों को हर साल काफी नुकसान होता है। इस नुकसान से बचा जा सके और इसे उपयोग में लाया जा सके इसके लिए अब उत्तराखंड अक्षय ऊर्जा विभाग के सहयोग से पंचायतों में बिजली उत्पादन इकाईयों स्थापित की जा रही हैं। अल्मोड़ा जिले में फिलहाल हवालबाग, लमगड़ा, ताकुला और सोमेश्वर में यह इकाईयां स्थापित की गई हैं। इन इकाईयों से बिजली उत्पादन होने के बाद यूपीसीएल के ग्रिड में जाएगी और उत्पादक इकाई को इसका निर्धारित मूल्य दिया जाएगा। दस दस किलोवाट क्षमता की इन इकाईयों की स्थापना के लिए बीस प्रतिशत की राशि केंद्र सरकार और जबकि शेष राशि ग्रीन टैक्स से दी जा रही है। इधर इन इकाईयों से उत्पादित बिजली लेने के लिए बिजली विभाग ने भी कवायद शुरू कर दी है। विभाग ने इन चार इकाईयों से ग्रिड तक बिजली लाने के लिए नजदीकी उप संस्थानों तक लाइनें बिछाने टेंडर की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अधिकारियों ने बताया कि कार्य पूरा होने के बाद इन इकाईयों से बिजली लेना शुरू कर दिया जाएगा। =========== पिरूल से कैसे बनेगी बिजली अल्मोड़ा : पिरूल से बिजली निर्माण के लिए इन इकाईयों में गैसी फायर भट्टी लगाई गई हैं। जिसमें पिरूल से मिथेन गैस का निर्माण होगा और जिससे जेनरेटर को चलाया जाएगा। जेनरेटर से उत्पादित होने वाली बिजली यूपीसीएल के ग्रिड तक पहुंचाई जाएगी।

========== जिले में फिलहाल चार इकाईयों से बिजली खरीदी जानी है। इकाईयों में उत्पादित बिजली को नजदीकी सब स्टेशन तक पहुंचाया जा सके इसके लिए लाइनें बिछाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। शीघ्र कार्य पूरा करा लिया जाएगा।

- दीनदयाल पांगती, अधिशासी अभियंता, विद्युत विभाग

Posted By: Jagran

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