संवाद सहयोगी, अल्मोड़ा : जी-गवर्नेस के क्षेत्र में जनपद ने एक और कदम बढ़ा लिया है। जिला योजना ही नहीं अब केंद्र सरकार के सतत विकास (एसडीजी) के 17 लक्ष्यों की प्राप्ति को भी भौगोलिक सूचना विज्ञान (जीआइएस) तकनीक की मदद ली जाएगी। एसडीजी में शामिल गरीबी उन्मूलन, कुपोषण, बेरोजगारी, स्वास्थ्य, शिक्षा के साथ ही पर्यावरण मुख्य बिंदु है। जीआइएस के जरिये हिमालयी राज्य में मौजूदा वैश्विक तापवृद्धि, जलवायु परिवर्तन, जल संरक्षण व संवर्धन आदि से जुड़े कार्य जहां आसान होंगे। खास बात कि बीस सूत्रीय कार्यक्रमों की भांति अब एसडीजी में भी रैंकिंग होगी। जिलों की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप राज्य व जिला योजनाओं को पंचायतों से जोड़ा जाएगा।

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गांवों से जुड़ेंगी राज्य सेक्टर व जिला योजना : डीएम

विकासभवन सभागार में गुरुवार को सतत विकास लक्ष्य की जिला स्तरीय कार्यशाला में मुख्य कार्यकारी अधिकारी नियोजन विभाग डॉ. मनोज कुमार पंत ने भावी योजना पर प्रकाश डाला। डीएम नितिन सिंह भदौरिया ने कहा, एसडीजी का राज्य सेक्टर व जिला योजना को सीधे ग्रामीण विकास से जोड़ा जाना है। मुख्य कार्यकारी अधिकारी नियोजन विभाग डॉ. मनोज ने कहा, ग्राम पंचायत विकास योजना के तहत गांवों की आवश्यकता, भौगोलिक स्थिति, जनसंख्या, एससी, एसटी, दिव्यांग, यूथ, कृषि, सिंचाई सुविधाएं, पेयजल, सड़क, स्वास्थ्य आदि का गहन आकलन कर रोडमैप तैयार होगा। ताकि योजना बनाने में मदद मिल सके।

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'पीछे कोई नहीं छूटे' सिद्धात पर बढ़ेंगे कदम

कार्यकारी अधिकानी नियोज डॉ. मनोज के मुताबिक सतत् विकास योजना का उद्देश्य रोजगार के साधनों का चिन्हीकरण, गरीबी उन्मूलन, पर्यावरण सुरक्षा, आर्थिक समानता, नवाचार कार्यक्त्रम, टिकाऊ रोजगार और सभी के लिए न्याय है। चूंकि योजना में राज्य, जिला व गावों के कई लक्ष्य एक दूसरे से जुड़े हैं, लिहाजा 'पीछे कोई नहीं छूटे' सिद्धात पर काम किया जाएगा। इस मौके पर निदेशक एनआरडीएमएस प्रो. जीवन सिंह रावत, डीडीओ केके पंत, अर्थ एवं संख्याधिकारी जीएस कालाकोटी, अपर संख्याधिकारी उदित वर्मा, बृजपाल सिंह, कौशल शाह, कुंदन लाल आदि मौजूद रहे।

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जी प्लान के लिए डाटा जुटाने के निर्देश

अल्मोड़ा : जिला योजना के विकास कायरें को जीआइएस तकनीक से प्रस्तावित कराने के लिए विकास भवन सभागार में जिला स्तरीय अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया गया। डीएम नितिन सिंह भदौरिया ने बताया कि पूरे राज्य में जीआइएस तकनीक विकसित करने वाला अल्मोड़ा पहला जिला बन गया है। जीआइएस के आधार पर ही वर्ष 2020-21 की जिला योजना बनाई जाएगी। बताया कि संबंधित विभाग जीआइएस मानचित्र के जरिये विकास कायरें के प्रस्ताव प्रस्तुत करेंगे। सभी विभागाध्यक्ष डाटाबेस जुटा जीआइएस सेल को उपलब्ध कराएं।

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'केंद्र के सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में जीआइएस के बेहतर परिणाम मिलेंगे। मातृ शिशु मृत्यु दर की वास्तविक स्थिति, सिंचाई नहरें, तालाब, आवास, सड़क आदि कहां बननी हैं, प्रगति आदि की जानकारी आमजन को भी रहेगी। यही जानकारी पहले कार्यालयों तक ही रह जाती थी। वहीं बीसूका के साथ अब जिलों की सतत विकास लक्ष्य में भी रैंकिंग तय की जाएगी। इसके अलए हम सीटूएन यानी कन्वर्जन, समन्वय व नेटवर्किग मॉडल पर काम करेंगे।

- डॉ. मनोज कुमार पंत, मुख्य कार्यकारी अधिकारी नियोजन उत्तराखंड सरकार'

Posted By: Jagran

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