निठारी कांड से बरी सुरेंद्र कोली की आत्महत्या, खोखा मालिक पर उकसाने का आरोप, कानूनी कार्रवाई की तैयारी
2006 Noida Nithari Case निठारी कांड से बरी हुए सुरेंद्र कोली ने हरिद्वार में खोखा मालिक द्वारा किराया बढ़ाने और ...और पढ़ें

HighLights
सुरेंद्र कोली ने हरिद्वार में खोखा मालिक के दबाव में आत्महत्या की।
खोखा मालिक ने किराया 25 हजार से बढ़ाकर 50 हजार किया था।
मददगार खोखा मालिक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की सलाह ले रहे हैं।
जागरण संवाददाता, रानीखेत। बहुचर्चित निठारी कांड में सुप्रीम कोर्ट से दोषमुक्त करार दिए जाने और रिहाई के बाद हरिद्वार में चाय समोसे का खोखा चला रहे सुरेंद्र कोली के मददगार कानूनी कार्रवाई के लिए विधिक राय ले रहे हैं।
आरोप है कि वहां के एक प्रभावशाली खोखा स्वामी ने माहभर में ही किराया 25 से बढ़ाकर 50 हजार कर दिया था। उस पर एडवांस भुगतान के लिए लगातार दबाव बनाया जा रहा था। इसी से तंग आकर सुरेंद्र कोली ने जिंदगी खत्म कर ली।
इस मामले में खोखा स्वामी पर उसे आत्महत्या करने के लिए उकसाने का आरोप भी लगाया जा रहा है। वह अपनी व्यथा फोन पर साझा किया करता था। उसे हिम्मत से काम लेने का सुझाव भी दिया गया था।
इसके बावजूद उसने आत्मघाती कदम क्यों उठा लिया, उसके हितचिंतक हैरान परेशान हैं। बेशक सुरेंद्र कोली रिहा हो चुका था, मगर न्याय मिलने से पहले ही बीवी बच्चों के छोड़ जाने और गांव में बेटे के रिहा होने की उम्मीद बांधे मां कुंती देवी से न मिलने का गम भुला नहीं पा रहा था।
गिरफ्तारी के बाद उससे जेल में मिलने पहुंचे पूर्व जिला पंचायत सदस्य नारायण सिंह रावत उसे हिम्मत बंधाते रहे। भरोसा दिलाते रहे कि भगवान के घर देर है, अंधेर नहीं है। उसे न्याय जरूर मिलेगा। हुआ भी यही।
बीते वर्ष उसे उच्च्तम न्यायालय ने दोषमुक्त करार दिया। वहीं मंगरूखाल के पूर्व प्रधान जाेगा सिंह ने बताया कि सुरेंद्र कोली कहता रहा कि बड़े लोगों ने उसे बलि का बकरा बना दिया। उसे कभी अपना पक्ष रखने ही नहीं देते थे।
निठारी कांड का बड़ा दोषी उसे ही बना दिया गया। बहरहाल, नारायण सिंह रावत व जोगा सिंह जैसे हितचिंतकों ने उसे रिहाई के बाद भी साथ नहीं छोड़ा। उसे हौसला देते रहे। उसे समझाया कि वह अच्छा कुशल कारीगर है।
किसी की नौकरी के बजाय छोटे स्तर से ही सही, अपना काम शुरू करे। इसलिए उसने गांव से दूर हरिद्वार से खोखा चलाकर अपना खर्च निकालने की ठानी। मगर यहां भी किस्मत पलटी मार गई।
पूर्व जिला पंचायत सदस्य नारायण सिंह रावत ने बताया कि सुरेंद्र कोली उसे रोज फोन कर बताता था कि खोखा कैसा चल रहा है। क्या परेशानी आ रही है। हालिया अमावस्या पर अच्छी कमाई के लिए उसने आलू के समोसे बनाए थे लेकिन वर्षा ने सब खराब कर दिया।
नारायण सिंह रावत का कहना है कि इस बीच खोखा स्वामी ने किराया 25 से बढ़ाकर 50 कर दिया और भुगतान का दबाव बनाने लगा तो सुरेंद्र बहुत तनाव में आ गया था।
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