दीप सिंह बोरा, रानीखेत

दुनिया की महाशक्ति अमेरिका ने भी माना कि आतंकवाद की वैश्विक चुनौती से निपटने में भारत से बेहतर साथी कोई और नहीं। अमेरिकी कमांडर विलियम ग्राहम ने कहा कि इस युद्धाभ्यास में दोनों देशों के सैनिक संयुक्त रूप से प्रशिक्षण, योजना के साथ मौजूदा आतंकवाद से मिल रही चुनौतियों का सामना करने के लिए नई तकनीक विकसित करेंगे। नागरिकों के साथ बेहतर तालमेल कायम कर कैसे आतंकविरोधी गतिविधियों को अंजाम तक पहुंचाया जाता है, यह भारतीय सैनिकों से बखूबी सीखा जाएगा। वहीं अत्याधुनिक तकनीक में निपुण अमेरिका से भारतीय सैनिकों को भी बहुत कुछ सीखने को मिलेगा।

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दिखेगी नया रणकौशल, नई कार्यकुशलता

दो सप्ताह तक चलने वाले अब तक के सबसे महत्वपूर्ण युद्धाभ्यास में भारत व अमेरिकी सैनिकों की आतंकवादियों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई तथा आतंकवाद से निपटने की नई कार्यकुशलता व तकनीक देखने को मिलेगी। साथ ही दोनों देशों की सेनाएं निगरानी, ट्रेकिंग, उपकरण, आतंकवादियों से निपटने के लिए विशेष हथियारों, विस्फोटक व आइआइडी डिटेक्टर्स तथा नवीनतम संचार उपकरणों का प्रयोग करेंगे। साथ ही संयुक्त रूप से किसी भी चुनौती या खतरों से निपटने को सुविकसित कुशल ड्रिल पर अमल करते हुए संयुक्त राष्ट्र संघ के चार्टर के तहत योजनाबद्ध तरीके से प्रशिक्षण लेंगे। भारत व अमेरिकी सैन्य विशेषज्ञ रणनीतिक, तकनीकि व रणकौशल को साझा भी करेंगे।

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युद्धाभ्यास में ये बटालियन शामिल

= भारत की वन-इन्फेंट्री बटालियन कांगो ब्रिगेड, गरुड़ डिवीजन व सूर्य कमांड के करीब 350 जांबाज

=अमेरिका की ओर से फ‌र्स्ट इन्फेंट्री बटालियन, 23-इन्फेंट्री रेजीमेंट, टू-स्ट्राइकर ब्रिगेड कांबेट टीम व सेवन-इन्फेंट्री डिवीजन के 350 जवान।

Posted By: Jagran