संवाद सहयोगी, रानीखेत : इसे जलवायु परिवर्तन कहें या रसायनों के प्रति बढ़ता रुझान। जैविक खेती वाले पहाड़ में अब मृदा की सेहत बिगड़ने लगी है। हालिया सब्जी व फसल उत्पादक विभिन्न गांवों से लिए गए मिट्टी के नमूनों की जांच से चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। चिंताजनक पहलू यह कि जनपद का अव्वल कृषि प्रधान विकासखंड ताड़ीखेत के खेतों में फॉस्फोरस, जिंक, लोहा आदि मुख्य पोषक तत्व की मात्रा तेजी से घट रही है।

उन्नत खेती के मकसद से जनपद के विभिन्न ब्लॉक क्षेत्रों के गांवों से मिट्टी के नमूनों की जांच कराई गई थी। इसकी रिपोर्ट चिंताजनक आई है। सहायक कृषि अधिकारी आनंद मेहरा के अनुसार पर्वतीय खेतों में कॉपर की कमी पाई गई है। इसकी मात्रा .4 पीपीएम होनी चाहिए जबकि यह 0.1 ही है। कॉपर की कमी से बीजों का अंकुरण नहीं हो पाता। हुआ भी तो पौधे को पोषण नहीं मिल पाता। जिंक 0.47 है जबकि यह 1.2 पीपीएम से ऊपर होना चाहिए। पहाड़ में फसल के रोग की चपेट में आने का यह बड़ा कारण है। वहीं लौह तत्व 4.5 पीपीएम से ऊपर होना चाहिए जबकि इसकी मात्रा भी कम निकली है।

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किसानों को बांटे मृदा परीक्षण कार्ड

विकासखंड के सुदूरा शिलंगी खग्यार गांव में किसान गोष्ठी में मुख्य अतिथि प्रमुख रचना रावत ने किसानों को मृदा परीक्षण कार्ड बांटे। उन्होंने उन्नत खेती के लिए समय समय पर मिट्टी की जांच कराने का आह्वान किया। उन्होंने विभागीय अधिकारियों से न्याय पंचायतवार शिविर लगा किसानों को जरूरत के अनुरूप दवा व मुख्य पोषक तत्वों के किट उपलब्ध कराने को कहा। साथ ही किसानों से कहा कि कृषि अधिकारियों की राय के अनुसार निश्चित मात्रा में उपयोग करें। ताकि मुख्य पोषक तत्वों की कमी दूर की जा सके।

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खग्यार कलस्टर ग्राम के लिए चयनित

प्रदेश में परंपरागत कृषि योजना शीघ्र शुरू होगी। इसके तहत अल्मोड़ा जनपद के विभिन्न ब्लॉकों से 550 गांव चुने जाने हैं। इसमें ताड़ीखेत का खग्यार गांव कलस्टर ग्राम के रूप में चुना गया है। प्रमुख रचना ने कहा, इस योजना का लाभ उठा किसान जैविक उत्पाद के जरिये आर्थिकी मजबूत करें। सहायक कृषि अधिकारी केएन कांडपाल ने ग्रामीणों से बागवानी से जुड़ने का आह्वान किया।

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ये रहे मौजूद

बीडीसी त्रिभुवन फत्र्याल, तुलसी मेहरा जैनोली, प्रधान गोपाल राम, तारा देवी शिलंगी, सरपंच सुरेंद्र सिंह व चतुर सिंह, बसंती देवी, देबुली देवी, हंसी देवी, प्रेमा देवी, प्रताप राम, उदय सिंह, देवकी नंदन, दिनेश चंद्र के साथ ही कृषि भूमि संरक्षण अधिकारी धीरज सिंह, विकासखंड प्रभारी नारायण बिष्ट, डॉ. प्रियंका कबडाल, चेतन भट्ट आदि।

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'कॉपर सल्फेट आदि मुख्य पोषक तत्वों में बेशक कमी आई है। फिर भी मैदान से स्थिति बेहतर है। इसके बावजूद मिट्टी की दशा सुधारने के लिए समय समय पर मृदा परीक्षण करा आवश्यकता के अनुरूप सब्सिडी पर कॉपर, जिंक आदि का मिक्सचर, जैविक खाद के किट आदि

उपलब्ध कराए जा रहे।

- प्रियंका सिंह, मुख्य कृषि अधिकारी'

Posted By: Jagran