संवाद सहयोगी, अल्मोड़ा : हत्या के एक मामले में सत्र न्यायाधीश डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार शर्मा ने तीन अभियुक्तों पर दोष सिद्ध पाया है। सजा पर सुनवाई के लिए सत्र न्यायाधीश ने अठारह मार्च की तिथि निर्धारित की है।

अभियोजन के अनुसार नेहा जोशी पत्‍‌नी सुरेश चंद्र निवासी देवलीखान ने 29 मई 2008 को अपने पति के बड़े भाई जो चंड़ीगढ़ में रहते हैं। उन्हें फोन कर बताया कि उनके पति सुरेश रात में खाना खाकर पैसे के किसी मामले में राजेंद्र नाम के व्यक्ति के यहां गए और देर रात तक वापस नहीं आए। जब सुरेश के बड़े भाई की बेटी ने सुरेश को फोन किया तो उसे नेहा ने ही उठाया और उसने अपने पास मौजूद ग्राम प्रधान कमला जोशी से उनकी बात कराई। कमला ने उन्हें बताया उनका भाई सुरेश विनायक रोड पर पड़ा हुआ है और उसकी मौत हो गई है। जिसके बाद सुरेश के बड़े भाई चंड़ीगढ़ से गांव रवाना हुए लेकिन उनके घर पहुंचने तक सुरेश का पोस्टमार्टम हो चुका था। अंतिम संस्कार के बाद जब गांव वालों के सामने सुरेश की पत्‍‌नी नेहा से पूछताछ की गई तो उसने बताया कि अभियुक्त घनश्याम उर्फ गोलू से उसके अवैध संबंधों के चलते सुरेश उस पर शक करते थे। जिस कारण धनश्याम और एक व्यक्ति ने उनकी हत्या कर दी। इस मामले में रिपोर्ट पटवारी क्षेत्र शीतलाखेत में लिखाई गई। जिस पर विवेचना के बाद आरोप पत्र न्यायालय में पेश किए गए। इस मामले में अभियोजन की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता गिरीश फुलारा, सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता शेखर चंद्र नैलवाल व विशेष लोक अभियोजक भूपेंद्र कुमार जोशी ने न्यायालय में 14 गवाह परीक्षित कराया। लिखित और मौखिक साक्ष्यों को सुनने के बाद सत्र न्यायाधीश डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार शर्मा ने नेहा जोशी पत्‍‌नी स्व. सुरेश चंद्र निवासी देवलीखान, सोनू उर्फ शंकर वैला निवासी पुत्र अंबादत्त निवासी देवलीखान, घनश्याम उर्फ गोलू पुत्र भवानी दत्त निवासी ग्राम बमर को हत्यारोपी पाया। सजा पर सुनवाई अठारह मार्च को होगी।

Posted By: Jagran

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