दीप सिंह बोरा, रानीखेत

दम तोड़ रही कोसी के पुनर्जनन से जुड़े कार्यो को कितनी संजीदगी से किया गया, इसकी हकीकत अब सामने आएगी। इसके लिए जीवनदायिनी के जलागम क्षेत्रों का भौगोलिक सूचना विज्ञान तंत्र (जीआइएस) तैयार किया जा रहा। इस अत्याधुनिक तकनीक से यह पता लग सकेगा कि कोसी के रिचार्ज जोन पर वास्तव में कहां, कितने पौधे लगाए गए। कितने सूख चुके। वर्षाजल को भूमिगत भंडार तक पहुंचाने के लिए कितने चाल खाल बनाए गए। उनकी गुणवत्ता या खामियों पर से पर्दा उठाने में भी मदद मिलेगी।

दरअसल, विलुप्ति की कगार पर जा पहुंची कोसी पर पिछले ढाई दशक से शोध व अनुसंधान में जुटे चेयरप्रोफेसर राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (दिल्ली) तथा निदेशक एनआरडीएमएस प्रो. जीवन सिंह रावत की रिपोर्ट पर राज्य सरकार ने कुमाऊं में कोसी व गढ़वाल में रिस्पना नदी का वजूद बचाने के लिए पुनर्जनन अभियान शुरू किया है। बरसात पूर्व तीन चार माह से कोसी के विभिन्न रिचार्ज जोन में लगभग पांच लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया। वर्षा पानी को भूगर्भीय जल भंडार तक पहुंचाने के लिए लाखों की संख्य में छिद्र, चाल खाल व खंतियां बनाने को मुहिम चली।

हरेला पर्व पर ताकुला ब्लॉक स्थित कोसी के जलागम क्षेत्र में वृहद पौधरोपण अभियान में बाकायदा मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत पहुंचे थे। इधर पुनर्जनन से जुड़े कार्यो की वास्तविक स्थिति पता करने के लिए अब महाअभियान में शामिल जलागम क्षेत्रों का प्रो. रावत के निर्देशन में जीआइएस तैयार किया जा रहा। इसके तहत एक क्लिक के दायरे में लगाए गए पौधों, चाल खालों की वास्तविक संख्या, मौजूदा स्थिति तथा तकनीकी गड़बड़ी का पता भी लगेगा।

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तब दोबारा लगाए जाएंगे पौधे

कोसी पुनर्जनन को महाअभियान के दूसरे चरण की तैयारी भी तेज हो गई है। खास बात कि जीआइएस तैयार होने से पूर्व डीएम के निर्देशन में बनी तकनीकी समिति कोसी के जलागम क्षेत्रों का जायजा लेगी। जहां पौधे जिंदा नहीं हैं, वहां दोबारा पौधरोपण किया जाएगा। सुरक्षा दीवार व हथबंदी तथा चाल खाल मानक के अनुसार न होने पर ये कार्य भी दोबारा कराए जाएंगे।

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हरियाली पर्व पर लगाए थे 1.67 लाख पौधे

सीएम त्रिवेंद्र की मौजूदगी में हरेला पर्व कोसी के जलागम क्षेत्र में 1.67 लाख पौधे लगाए गए थे। इनकी सुरक्षा को चहारदीवारी व अन्य कार्य भी कराए गए थे।

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'वन विभाग ने क्षेत्र आदि का ब्योरा दे दिया है। हवालबाग व ताकुला ब्लॉक के उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में कराए गए कार्यो के डाटाबेस लेकर जीआइएस तैयार कर रहे हैं। इससे कोसी के जलागम क्षेत्रों का पूरा मानचित्र बनाया जाएगा। इससे साफ पता लग जाएगा कि पौधे कहां कितने लगाए गए हैं। कितने जिंदा हैं। वहीं कितने हेक्टेयर में कार्य कराए गए हैं, वास्तविकता स्पष्ट होगी। जहां खामियां मिलेंगी, वहां दोबारा कार्य कराए जाएंगे।

- प्रो. जीवन सिंह रावत, चेयरप्रोफेसर राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग'

Posted By: Jagran