संवाद सहयोगी, अल्मोड़ा : कृषि एवं बागवानी के लिहाज से उर्वर जनपद के धरतीपुत्र भावी आम बजट में विषम भौगोलिक हालात व जटिल खेती वाले पर्वतीय राज्य को महत्व मिलने की आस लगाए बैठे हैं। चौतरफा चुनौतियों वाली कठिन कृषि को आसान बनाने की पुरजोर वकालत करते हुए किसानों ने पहाड़ के अनुरूप नए प्रावधान रखने की जरूरत पर जोर दिया है। वहीं अतिसूक्ष्म जलवायु परिक्षेत्र के अनुसार परियोजनाओं के निर्माण की व्यवस्था हो। साथ ही लघु कृषि यंत्रों को आगामी बजट में जीएसटी मुक्त रखे जाने पर खास जोर दिया है।

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फोटो : 25 एएलएम पी 8 'पहाड़ी उत्पादों का समर्थन मूल्य बढ़ाना चाहिए। बजट में बागवानी विकास को कम से कम 20 हजार लीटर क्षमता के छत जल संग्रहण टैंकों का प्रावधान हो। ताकि सूखे से राहत मिले। जंगली जानवरों से फसल क्षति रोकने को नेट हाउस का प्रबंध कर इसे जीएसटी से मुक्त रखा जाए।

- प्रकाश जोशी, कृषि विशेषज्ञ'

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फोटो : 25 एएलएम पी 9 'माइक्रो क्लाइमेटिक जोन यानी अतिसूक्ष्म जलवायु परिक्षेत्र के अनुसार परियोजनाओं का प्रावधान हो। उम्मीद है कि इस बार बजट में पहाड़ के भूगोल, जटिलताओं के मद्देनजर पहल होगी। आधुनिक कृषि यंत्र सीधे किसानों को जीएसटी मुक्त मुहैया कराने की व्यवस्था हो।

- डॉ. रमेश सिंह बिष्ट, बागवान'

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फोटो : 25 एएलएम पी 7आरआर 'जंगली जानवर चुनौती बन चुके हैं। फसल क्षति रोकने को बजट में चेन फेंसिंग जाली अनुदान में मुहैया कराने का प्रावधान हो। छोटी जोत व आर्थिकी को देखते पावर ट्रिलर, सिंचाई लिफ्टिंग पंप, थ्रेशर आदि को जीएसटी मुक्त रखने की जरूरत है।

- गोपाल सिंह बिष्ट, प्रगतिशील किसान कोसी'

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फोटो : 25 एएलएम पी 10

'सही सर्वे का प्रावधान हो। फसल तैयार होने के बाद परिणाम जानने की व्यवस्था होनी चाहिए। पहाड़ के कृषि उत्पादक छोटी छोटी मंडियां या संग्रहण केंद्रों का प्रावधान हो। बिचौलिया प्रथा पर अंकुश लगना चाहिए ताकि लागत व उचित मूल्य मिल सके।

- पंकज कनवाल, वरिष्ठ अधिवक्ता एवं विशेषज्ञ'

Posted By: Jagran

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