डीके जोशी, अल्मोड़ा

देवभूमि उत्तराखंड की धरा पर जन्म लेकर अनेक सपूतों ने भारत माता की रक्षा के लिए अपने को समर्पित किया। उन्हीं वीर सपूतों में से एक नाम है स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्व.राम सिंह धौनी का। उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के लमगड़ा ब्लॉक अंतर्गत तल्ला सालम के ग्राम बिनौला के एक सामान्य परिवार में हिम्मत सिंह धौनी व कुंती देवी के घर एक बालक ने 24 फरवरी, 1893 में जन्म लिया, जिसका नाम राम सिंह धौनी रखा गया। जो कालांतर में जय¨हद का प्रणेता व स्वतंत्रता आंदोलन का अमर सेनानी बना। बचपन से ही कुशाग्र बुद्धि के चलते उन्हें सालम के पहले स्नातक होने का गौरव हासिल हुआ। उन्होंने देश की आजादी के आंदोलन के चलते सरकारी नौकरी भी ठुकरा दी और देश सेवा में जुट गए। विभिन्न जनोपयोगी कार्य करने के बाद 12 नवंबर, 1930 को उनका निधन हो गया।

राम सिंह धौनी हाईस्कूल की पढ़ाई के समय एकबार स्वामी सत्यदेव महाराज के संपर्क में आए। हाईस्कूल उत्तीर्ण करने पर उनके माता-पिता चाहते थे कि बेटा कोई रोजगार प्राप्त कर पारिवारिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करे, किंतु धौनी जी के मन में समाज सुधार व देश सेवा की धुन पैदा हो गई। उन्होंने मिडिल परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की और फिर इलाहाबाद के क्रिश्चियन कॉलेज से स्नातक डिग्री भी प्रथम श्रेणी में हासिल की। इससे धौनी को सालम क्षेत्र का प्रथम स्नातक होने का गौरव प्राप्त हुआ। प्रयाग में शिक्षा ग्रहण करते समय ही धौनी जी का झुकाव स्वतंत्रता आंदोलन की ओर हुआ तथा होम रूल लीग के सदस्य बन गए। बीए की डिग्री लेने के बाद उनकी कुशाग्र बुद्धि को देखते हुए उन्हें ब्रिटिश सरकार तत्कालीन समय में नायब तहसीलदार बनाना चाहती थी, लेकिन उन्होंने सरकारी पद को ठुकरा दिया। इसके बाद राम सिंह धौनी जयपुर में एक विद्यालय में प्रधानाध्यापक बने। भारत माता को आजाद देखने का सपना साकार करने के लिए उन्हें नौकरी रास नहीं आयी और वह वापस अल्मोड़ा लौट आए। उन्होंने उस दौर में जिले के सालम क्षेत्र समेत अन्य विभिन्न क्षेत्रों में जाकर युवाओं में देश प्रेम की अलख जगाई तथा उनमें आजादी के लिए जोश भरा। उन्होंने जिला कांग्रेस कमेटी के महामंत्री का दायित्व भी निभाया तथा बाद में जिला परिषद के पहले अध्यक्ष निर्वाचित हुए। जिला परिषद अध्यक्ष के रूप में उन्होंने जनता की जरूरतों के अनुसार कई प्राथमिक विद्यालय व औषधालय खुलवाए। शिक्षा व स्वास्थ्य प्राथमिकताओं में शामिल था। उन्होंने 1921 में सर्वप्रथम जय¨हद का उद्बोधन किया। अल्मोड़ा जिले के सालम क्षेत्र के स्वतंत्रता सेनानी राम सिंह धौनी ने सालम क्षेत्र समेत अल्मोड़ा, नैनीताल, मुंबई, जयपुर, बीकानेर समेत कई बड़े शहरों में 1919 से 1930 तक घूम-घूमकर लोगों में आजादी के प्रति अलख जगाई।

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क्या था उनके जीवन का मुख्य उद्देश्य

-महापुरूषों के कार्यो से प्रेरणा एवं अपने से बड़ों का सदा आदर करना

-देश की दशा का ज्ञान एवं उनके सुधारों के उपायों की खोज करना

-ऐसे नवयुवकों को तैयार करना जो देश की भलाई में ही जीवन लगाएं

-शिक्षा के माध्यम से देश के युवाओं को जागृत करना 88 वीं पुण्य तिथि पर कल किए जाएंगे याद

सालम समिति तथा स्व.राम सिंह धौनी ट्रस्ट की ओर से अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित कर सोमवार 12 नवंबर को उनकी 88 वीं पुण्य तिथि पर उनके व्यक्तित्व व कृतित्व पर चर्चा कर उन्हें श्रद्धांजलि दी जाएगी। सालम समिति की विचार गोष्ठी धारानौला स्थित जिला पंचायत परिसर तथा ट्रस्ट की गोष्ठी धारानौला-एनटीडी मोटरमार्ग के सिकुड़ा स्थित उनकी मूर्ति स्थल पर होगी।

Posted By: Jagran